सिरपुर तालाब को अतिक्रमण से स्थायी रूप से सुरक्षित करने के लिए नगर निगम ने अब उसकी वास्तविक सीमा तय कराने की पहल की है, लेकिन जिला प्रशासन स्तर पर सीमांकन की प्रक्रिया करीब दो माह से आगे नहीं बढ़ पाई है। निगम के ड्रेनेज विभाग ने तालाब के सीमांकन के लिए प्रशासन को पत्र भेजा था।
अब दोबारा पत्र भेजकर जल्द कार्रवाई की मांग की गई है
निगम का मानना है कि सीमांकन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि तालाब की जद कहां तक है और किन हिस्सों में अतिक्रमण हो चुका है। नगर निगम के एमआईसी सदस्य अभिषेक बबूल शर्मा के अनुसार तालाबों की मौजूदा सीमा करीब 25 वर्ष पुरानी है। ऐसे में समय के साथ हुए शहरी विस्तार और निर्माण के बीच वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए नए सिरे से सीमांकन जरूरी है। उनका कहना है कि अतिक्रमण की शिकायत मिलने पर निगम कार्रवाई करता है, लेकिन स्थायी सुरक्षा के लिए ऐसी सीमा तय होना जरूरी है, जिसे कानूनी और प्रशासनिक मान्यता प्राप्त हो। इसके बाद सुरक्षा दीवार सहित अन्य संरक्षण कार्य भी निर्धारित सीमा के आधार पर किए जा सकेंगे।
सिरपुर को रामसर साइट का दर्जा मिलने के बाद तालाब के संरक्षण का महत्व और बढ़ गया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार निगम ने अब तक सिरपुर से सबसे अधिक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है। सीवरेज का पानी तालाब में पहुंचने से रोकने के लिए एसटीपी प्लांट बनाया गया है और तालाब से जुड़ी चैनलों को भी अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। अब कोशिश है कि यहां प्राकृतिक वातावरण बना रहे और मानवीय गतिविधियां सीमित रहें, जिससे स्थानीय और प्रवासी पक्षियों को प्राकृतिक आवास मिल सके। पर्यावरण विशेषज्ञ और भूजल वैज्ञानिक सुधीन्द्र मोहन शर्मा के मुताबिक इंदौर में कभी हर गांव में तालाब हुआ करता था। शहरी विस्तार के दौरान जलभराव क्षेत्रों में सड़कें और निर्माण होने से कई तालाब खत्म हो गए। बचे हुए तालाब अब शहर की जल विरासत हैं। लगातार हो रहे बोरिंग और घटते भूजल स्तर के बीच इनका संरक्षण जरूरी है, क्योंकि तालाबों में पानी रहने से भूजल रिचार्ज में मदद मिलती है। इसीलिए सिरपुर का सीमांकन अब अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ शहर के जल और पर्यावरण संरक्षण की दीर्घकालीन योजना के लिए अहम माना जा रहा है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 2 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




