मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
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संपादकीय कागजों पर ‘असुरक्षित’ जमीन पर बेपरवाही: करोल बाग हादसे ने खोली व्यवस्था की पोल ज

प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। असुरक्षित मकानों को तुरंत खाली कराकर सख्त कदम उठाना बेहद जरूरी है। देश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पुरानी एवं जर्जर इमारतें आम लोगों…

प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। असुरक्षित मकानों को तुरंत खाली कराकर सख्त कदम उठाना बेहद जरूरी है। देश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पुरानी एवं जर्जर इमारतें आम लोगों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं। कई बार स्थानीय प्रशासन की ओर से ऐसी इमारतों को ‘असुरक्षित’ तो घोषित कर दिया जाता है, लेकिन उन्हें खाली कराने में कोई तत्परता या गंभीरता नजर नहीं आती है। यही नहीं, कई दफा जर्जर भवन को मालिक खुद ही गिरा देते हैं, लेकिन इस कार्य में सुरक्षा के माकूल प्रबंधों का अभाव भी हादसे का कारण बन जाता है। ऐसी ही एक घटना बीते शुक्रवार को दिल्ली के करोल बाग इलाके में हुई, जब पुरानी दो मंजिला इमारत के ध्वस्तीकरण के दौरान एक श्रमिक की जान चली गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक, इस इमारत को गिराने के लिए सरकार के संबंधित महकमे से अनुमति नहीं ली गई थी। ऐसे में सवाल है कि अगर नियमों और सुरक्षा उपायों की अनदेखी की जाती है, तो क्या इसके लिए विभागीय अधिकारियों की भी जवाबदेही तय नहीं की जानी चाहिए? गौरतलब है कि पुराने खस्ताहाल मकान हर साल खासकर बरसात के मौसम में लोगों की जान के लिए खतरा बन जाते हैं। यह समस्या खास तौर पर उन शहरों में ज्यादा गंभीर है, जहां घनी आबादी और पुरानी बस्तियां हैं। देश भर में जर्जर इमारतों को चिह्नित कर उन्हें सरकारी दस्तावेज में असुरक्षित घोषित करने की व्यवस्था पहले से मौजूद है। मगर स्थानीय प्रशासन का इस ओर ध्यान कम ही जाता है। जिन पुराने भवनों को असुरक्षित घोषित किया जाता है, उन्हें खाली कराने, गिराने या पुनर्निर्माण की प्रक्रिया भी वर्षों तक अटकी रहती है। यह विभागीय लापरवाही का ही नतीजा होता है कि ऐसी इमारतें कई बार हादसों का कारण बन जाती हैं। सवाल यह भी है कि करोल बाग इलाके में इमारत का ध्वस्तीकरण विभागीय अनुमति के बिना कैसे हो रहा था? जर्जर भवनों की पहचान करना और उन्हें गिराने के कार्य की निगरानी करना किसकी जिम्मेदारी है? कायदे से असुरक्षित इमारतों का नियमित वैज्ञानिक सर्वेक्षण होना चाहिए और उनकी श्रेणीबद्ध सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही उन्हें खाली कराने और गिराने के लिए स्पष्ट नीति एवं योजना का होना भी जरूरी है। प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों के प्रति पुलिस का जो रवैया देखा गया, उसकी वजह से उस पर काफी सवाल उठे।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 24 अगस्त 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें