न.प्र.)। विधानसभा चार के वार्ड 71 से जुड़े विश्वकर्मा नगर के रहवासियों ने बगीचे में बनने वाली पानी की टंकी के विरोध में मोर्चा खोल दिया है।
रहवासियों ने पाइल टेस्टिंग के लिए आए ठेकेदार के कर्मचारियों और टैक्टर मशीन को विरोध कर उल्टे पांव लौटने पर मजबूर कर दिया। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि विश्वकर्मा नगर का बगीचा एक ऐसा जीवट बगीचा है
लोग बोले हमारे क्षेत्र में मिल रहा पर्याप्त नर्मदा का पानी
जहां आसपास की कई कालोनियों के लोग रोजाना घूमने और स्वास्थ्य लाभ लेने आते है। इस बगीचे पर तीस साल पहले कालोनाइजर ने भूमाफियाओं से मिलकर
लोगों का कहना है कि प्राकृतिक छटा, पेड़-पौधे और हरियाली से भरपूर बगीचा नर्मदा की पानी की टंकी बनने से पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा। यही नहीं क्षेत्र के सबसे विकसित बगीचे को नष्ट करने का षडयंत्र किया जा रहा है जिसका लोग विरोध कर रहे है। वहीं क्षेत्र के रहवासी दिनेश चावड़ा, विश्वजीत सिसोदिया, प्रशांत होल्कर, विक्रम शर्मा, संजीव उमरकर, ओमप्रकाश बावरे, रजत दुबे का कहना है कि हमारे यहां पर्याप्त नर्मदा का पानी मिल रहा है। वहीं हम हरे-भरे विकसित बगीचे को खत्म कर सीमेन्ट का इतना बड़ा टंकी रूपी रावण खड़ा करने की परमिशन नहीं दे सकते। लोगों का कहना है कि टंकी बनाने के लिए सिर्फ यही जगह बची है क्या? बहुत सी वैकल्पिक जगह होने के बावजूद आखिर यहीं टंकी बनाने का क्या औचित्य है। प्लाट काट दिये थे। लेकिन क्षेत्र के रहवासियों की एकजुटता और प्रयासों से कोर्ट में केस लड़कर यह बगीचा बचाया गया।
इसके बाद क्षेत्रीय पार्षद कंचन गिदवानी और विधायक मालिनी गौड़ के प्रयासों से क्षेत्र के इस एक मात्र बड़े बगीचे को सबसे विकसित बगीचा बनाया गया। वहीं अब निगम यहां लोगों के विरोध के बावजूद पानी की टंकी बनाने पर आमादा है, जबकि रहवासी इसका विरोध कर रहे हैं।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 12 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 8 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




