सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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एमआर-12 निर्माण प्रक्रिया की धीमी रफ्तार पर उठ रहे सवाल

आईडीए का 100 प्लॉट शासन को देने का निर्णय वापस,क्या अब मिलेगी पुनर्वास प्रक्रिया को रफ्तार

एमआर-12 निर्माण प्रक्रिया की धीमी रफ्तार पर उठ रहे सवाल

सिंहस्थ 2028 की धीमी तैयारियों के बीच इंदौर की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजना एमआर-12 को लेकर पिछले दिनों आईडीए की बैठक में एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय सामने आया था। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) ने करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य के 100 प्लॉट शासन को देने का अपना पूर्व निर्णय वापस ले लिया है। साथ ही अब इन प्लॉटों का उपयोग प्राधिकरण अपनी विकास योजनाओं और आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए करेगा। वहीं बड़ी बात यह है कि आईडीए के इस फैसले को केवल प्लॉटों का निर्णय मानकर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे सिंहस्थ की महत्वपूर्ण योजनाओं एमआर-12 ओर एमआर-11 और अन्य महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

एमआर-12 निर्माण प्रक्रिया की धीमी रफ्तार पर उठ रहे सवाल

क्या अब तेज होगी एमआर-12 निर्माण कार्य

की राह? —गौरतलब है कि एमआर -12 परियोजना लंबे समय से भूमि संबंधी बाधाओं, पुनर्वास और तकनीकी प्रक्रियाओं की धीमी रफ्तार के कारण चर्चा में रही है। दरसअल पहले प्राधिकरण द्वारा बाधक परिवारों के सर्वे, रेलवे फ्लाईओवर के नए डिजाइन और कान्ह नदी पर पुल निर्माण जैसी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जा चुका है। साथ ही अब 100 प्लॉट अपने पास रखने के निर्णय से यह संभावना मजबूत हुई है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और परियोजना प्रबंधन के लिए आईडीए के पास अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे, जिससे परियोजना की गति बढ़ सकती है।

जनता की भी उम्मीदें

बढ़ीं- इंदौर शहर के लोगों का कहना है कि एमआर-12 केवल एक सड़क नहीं, बल्कि सिंहस्थ 2028 की लाइफलाइन है। यदि यह समय पर पूरी होती है तो लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम होगी और शहर में ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा।

इधर,उठ रहे लोगों के

सवाल: 850 बाधक परिवारों का सर्वे कब होगा पूरा? पुनर्वास की प्रक्रिया कब

शुरू होगी? – कान्ह नदी पुल और मुख्य सड़क का निर्माण किस समय-सीमा में पूरा होगा?

क्या दिसंबर 2027 तक एमआर-12 पूरी तरह तैयार

हो जाएगी? – पारदर्शिता की उठ रही मांग

शहर के लोगों का मानना है कि इतनी महत्वपूर्ण परियोजना पर हर महीने सार्वजनिक प्रगति रिपोर्ट जारी की जानी चाहिए, ताकि लोगों को पता चलता रहे कि कार्य किस चरण में है और लक्ष्य के अनुसार प्रगति हो रही है या नहीं। वहीं बड़ी बात यह है कि एमआर-12 केवल इंदौर की सड़क परियोजना नहीं, बल्कि सिंहस्थ 2028 की सफलता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा है। वहीं इस योजना में हाल के निर्णय सकारात्मक संकेत देते हैं, लेकिन अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि प्रशासनिक निर्णय जमीन पर कितनी तेजी से दिखाई देते हैं। जनता की अपेक्षा है कि पुनर्वास, निर्माण और सभी तकनीकी प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी हों, ताकि सिंहस्थ से पहले यह बहुप्रतीक्षित परियोजना वास्तव में साकार हो सके।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 5 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 8 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें