न.प्र.)। किशनगंज थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का एक नया और अनूठा मामला सामने आया है, जहां एक सहायक प्रोफेसर का यूपीआई ऐप हैंग कर अज्ञात साइबर ठगों ने उनके खाते से 32 हजार रुपये पार कर दिए। पीड़ित जब किराना दुकान पर सामान खरीदने के बाद क्यूआर कोड स्कैन कर पेमेंट कर रहे थे, तो ऐप बार-बार पासवर्ड मांगता रहा। बाद में ट्रांजेक्शन हिस्ट्री चेक करने पर पता चला कि उनकी बिना अनुमति के पैसे किसी अन्य महिला के खाते में ट्रांसफर हो चुके थे। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
किशनगंज पुलिस के अनुसार, धोखाधड़ी की यह वारदात वेटनरी कॉलेज कैंपस किशनगंज निवासी मोहब्बत सिंह पिता राधुसिंह जमरा के साथ घटित हुई। फरियादी ने बताया कि वे वेटनरी कॉलेज किशनगंज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर पदस्थ हैं। उनके रियलमी कंपनी के मोबाइल में एयरटेल की सिम लगी हुई है, जो उनके यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के खाते और फोनपे ऐप से लिंक है। घटना के एक दिन पहले से ही उनका मोबाइल फोन बार-बार हैंग हो रहा था। 29 अगस्त को जब वे सामान खरीदने के लिए किशनगंज स्थित एक किराना दुकान पर गए, तो उन्होंने सामान का भुगतान करने के लिए दुकान का क्यूआर कोड स्कैन किया। फोनपे का पासवर्ड डालने के बाद भी पेमेंट पूरा नहीं हुआ और ऐप बार-बार पासवर्ड मांगने लगा। प्रोफेसर ने 3 से 4 बार सही पासवर्ड दर्ज किया, लेकिन भुगतान विफल रहा। इसके बाद उन्होंने दुकानदार को नकद रुपये देकर सामान लिया। दुकान से वापस आने के बाद जब प्रोफेसर ने अपने फोनपे ऐप की ट्रांजेक्शन हिस्ट्री चेक की, तो उनके होश उड़ गए। उनके खाते से कुल 32,000 रुपये की राशि अज्ञात तरीके से कट चुकी थी, जो 'प्रीति' नाम की किसी महिला के बैंक खाते में ट्रांसफर दिखाई दे रही थी। धोखाधड़ी का अहसास होते ही पीड़ित ने तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद वे किशनगंज थाने पहुंचे और आपबीती बताई।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 9 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 12 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




