मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
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पाषदों की मनमर्जी से चल रही मोबाइल टेस्टिंग मशीन

सड़क निर्माण से लेकर सड़क बनने तक की मॉनिटरिंग मशीन से क्यों नहीं की गई? सड़क बनने के बाद ही क्यों हुआ खुलासा, आईडीए की तरह इंदौर नगर निगम भी क्वालिटी कंस्ट्रक्शन के लिए जांच सिस्टम बनाए

नगर निगम में होने वाले निर्माण कार्यों पर संदेह बना रहता है क्योंकि गुणवत्ता को लेकर नगर निगम चाहे जितने दावे कर ले जो सिस्टम इंदौर विकास प्राधिकरण निर्माण के दौरान क्वालिटी कंट्रोल और क्वालिटी चेक के लिए उपयोग करता है उसकी नगर निगम में कहीं ना कहीं कमी दिखाई देती है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नगर निगम में प्राधिकरण जैसा उच्च गुणवत्ता वाला निर्माण कार्य हो इसके लिए मोबाइल टेस्टिंग मशीन बनाई थी जिसका उद्देश्य निर्माण कार्य आरंभ से लेकर अंत तक क्वालिटी चेक करना था लेकिन कितने चेक किया गया यह सवालों के घेरे में है।

सूत्रों के अनुसार मोबाइल टेस्टिंग मशीन का उपयोग पार्षदों की मनमर्जी के अनुसार होता है इसीलिए पूरे शहर की गुणवत्ता को लेकर मोबाइल टेस्टिंग मशीन की उपयोगिता नहीं दिखाई देती। जनकार्य विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि मोबाइल मशीन केवल वही उपयोग की जाती है जहां पर पार्षद या फिर एमआईसी सदस्य कहते हैं स्कीम नंबर 54 में घटिया सड़क निर्माण पूरा होने के बाद मोबाइल टेस्टिंग मशीन का उपयोग किया गया जबकि नियम अनुसार सड़क निर्माण के लिए जो पदार्थ और मिक्सर बनाया जाता है उसका एक भाग अधिकारी के लैब से टेस्ट होना चाहिए और इसकी रिपोर्ट पर अंतिम सहमति मुख्यमंत्री की होती है। ऐसे में सवाल उठता है की पूरी सड़क बनने के बाद क्वालिटी का ध्यान नगर निगम अधिकारियों को क्यों नहीं आया और पार्षद भी पूरी सड़क बनने के बाद क्यों जगे? मामले में स्ट्रक्चर इंजीनियर अतुल सेठ ने बताया कि नगर निगम का निर्माण हमेशा से ही सवालों के घेरे में रहा है। जो ठेकेदार नगर निगम में काम करते हैं वह आईडीए, एनएचएआई, पीडब्लूडी, एमपीआरडीसी में काम नहीं कर सकते क्योंकि उनके कार्य की गुणवत्ता को लेकर संदेह की स्थिति रहती है इसीलिए। निर्माण के दौरान नगर निगम अधिकारियों की मॉनिटरिंग में कमी और कमीशन क्वालिटी कंस्ट्रक्शन में बाधक बनता है। घटिया निर्माण का मुख्य कारण यह भी है इसके अलावा समय पर भुगतान नहीं होने के चलते ठेकेदार घटिया मटेरियल इस्तेमाल करते हैं। स्कीम नंबर 54 के अलावा इंदौर में कई ऐसी बनी है जिसका घटिया निर्माण हुआ और बाद में सुधार भी नहीं गया।

1. स्कीम नंबर 94 बॉम्बे हॉस्पिटल के समीप सर्विस रोड पूर्व महापौर कृष्ण मुरारी मोघे के कार्यकाल में बनाई गई थी लेकिन इस सड़क का घटिया निर्माण हुआ था, 3 माह में उखड़ गई थी।

2. वहीं दूसरी सड़क नगर निगम द्वारा रिंग रोड पर शहीद पार्क के समय रोबोट चौराहे तक सर्विस रोड बनाई गई थी। यह सड़क पूर्व महापौर मालिनी गौड़ के कार्यकाल में बनी और सड़क उखड़ गई यह सड़क आज भी जर्जर हालत में है जिसको लेकर नगर निगम ने अब तक कोई एक्शन नहीं लिया।

मामले में अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ने बताया कि नगर निगम का मॉनिटरिंग सिस्टम मजबूत किया जा रहा है जो गलतियां उपयांत्रियों द्वारा सड़क की मॉनिटरिंग में की गई है उसको लेकर एक्शन लिया जाएगा। इसके अलावा घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदारों को हमेशा के लिए नगर निगम में काम करने का अवसर नहीं मिलेगा। वही मामले में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि यह जनता के साथ धोखाधड़ी है। नगर निगम को निर्माण कार्यों पर निगरानी बढ़ाने के साथ ही आम नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से लेना होगा। सब कुछ कमीशन का खेल है, नगर निगम में इसीलिए गुणवत्ता पूर्ण काम नहीं होते।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 30 जुलाई 2026 के अंक में पृष्ठ 3 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें