सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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ऑनलाइन व्यवस्था के दौर में भी पोस्ट ऑफिस की पुरानी कार्यप्रणाली पर सवाल

पासबुक प्रिंटिंग और भुगतान प्रक्रिया की परेशानियों पर सुधार की मांग

न.प्र.)। देश में पोस्ट ऑफिस की अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन और डिजिटल व्यवस्था से जुड़ चुकी हैं। इसके बावजूद कई जगहों पर ग्राहकों और एजेंटों को ऐसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा है, जिन्हें आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप सरल किए जाने की जरूरत महसूस होती है।

पोस्ट ऑफिस की योजनाओं में नए खाते खोलने और निर्धारित लक्ष्य पूरा करने को लेकर कर्मचारियों पर दबाव की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। आरोप यह भी हैं कि लक्ष्य पूरा करने के दबाव में एजेंटों और ग्राहकों पर छोटे-छोटे खातों सहित नए खाते खुलवाने का दबाव बनाया जाता है। यदि कहीं 100 रु. जैसे न्यूनतम राशि वाले खाते केवल लक्ष्य पूरा करने के उद्देश्य से खोले जा रहे हैं, तो इसकी विभागीय जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

एमआईसी खातों के ब्याज भुगतान की प्रक्रिया

पर सवाल- पोस्ट ऑफिस की मंथली स्कीम में वर्तमान ब्याज दर 7.4³ है। कई ग्राहकों का कहना है कि ब्याज भुगतान को सीधे उनके बैंक खाते में भेजने की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होनी चाहिए। वहीं कुछ स्थानों पर ब्याज भुगतान और खाते से जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर ग्राहकों को बार-बार पोस्ट ऑफिस जाना पड़ता है। यदि किसी जीपीओ या पोस्ट ऑफिस में लंबे समय से ब्याज भुगतान बैंक खाते में स्वतः ट्रांसफर नहीं हो रहा है, तो विभाग को इसकी स्पष्ट वजह बतानी चाहिए और जहां हो, डिजिटल/ऑटोमैटिक भुगतान

मैच्योरिटी भुगतान में भी सरलता की जरूरत- एलआईसी और निजी वित्तीय संस्थानों में कई मामलों में

विवरण और कैंसिल चेक प्राप्त होने के बाद ग्राहक को बार-बार कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके मुकाबले पोस्ट ऑफिस की मैच्योरिटी

है, तो यह व्यवस्था डिजिटल इंडिया के उद्देश्य के अनुरूप

पासबुक प्रिंटिंग अभी भी

में पासबुक प्रिंटिंग की व्यवस्था भी कई जगह पुराने तरीके से

गुणवत्ता, कभी हल्का तो कभी गहरा प्रिंट, मशीनों की संभव

व्यवस्था लागू करनी चाहिए।

आवश्यक दस्तावेज, बैंक

अथवा भुगतान संबंधी प्रक्रिया में यदि ग्राहक को लंबे समय तक लाइन में खड़ा होना पड़ता

नहीं कही जा सकती।

बड़ी समस्या- पोस्ट ऑफिस

चल रही है। प्रिंटिंग की उपलब्धता और ग्राहकों की लंबी कतार जैसी समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में पासबुक खराब होने की शिकायतें सामने आती हैं। जब बैंकिंग क्षेत्र में ग्राहक स्वयं मशीन के माध्यम से कुछ सेकंड में अपनी पासबुक अपडेट कर सकते हैं, तो पोस्ट ऑफिस में भी यह आटोमेटिक पासवुक प्रिंटिंग मशीन की सुविधा बड़े स्तर पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

लाखों ग्राहकों और एजेंटों का समय बच सकता

है- पोस्ट ऑफिस में छोटी- छोटी प्रक्रियाओं के लिए ग्राहक को 30 मिनट से लेकर कई बार उससे अधिक समय तक इंतजार करना पड़ता है। इसका सीधा असर ग्राहकों के अनुभव के साथ-साथ पोस्ट ऑफिस के प्रति लोगों के भरोसे पर भी पड़ता है।

सरकार से प्रमुख मांगें-

1. लक्ष्य आधारित खाता खोलने की प्रक्रिया की पारदर्शी जांच हो।

2. ग्राहकों और एजेंटों पर अनावश्यक दबाव की शिकायतों के लिए शिकायत निवारण व्यवस्था मजबूत हो। 3. एमआईसी सहित पात्र ब्याज भुगतान को बैंक खाते में डिजिटल रूप से ट्रांसफर करने की व्यवस्था सरल की जाए। 4. मैच्योरिटी भुगतान की प्रक्रिया को अधिकतम डिजिटल और पेपरलेस बनाया जाए। 5. ग्राहकों को केवल आवश्यक कार्य के लिए ही पोस्ट ऑफिस बुलाया जाए। 6. प्रत्येक बड़े पोस्ट ऑफिस/जीपीओ में पर्याप्त आटोमेटिक पासवुक प्रिंटिंग मशीन लगाई जाएं।

7. पासबुक प्रिंटिंग की गुणवत्ता और मशीनों के रखरखाव की नियमित निगरानी हो।

8. ग्राहकों के लिए टोकन/क्यू मैनेजमेंट और ऑनलाइन स्टेटस जैसी सुविधाएं बढ़ाई जाएं।

9. एजेंटों के लिए भी स्पष्ट और एक समान डिजिटल प्रक्रिया बनाई जाए।

10. पोस्ट ऑफिस को वास्तव में आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप बनाने के लिए समयबद्ध सुधार लागू किए जाएं।

पोस्ट ऑफिस देश के करोड़ों लोगों के भरोसे का संस्थान है। इसलिए जरूरी है कि इसकी सेवाएं भी उसी भरोसे के अनुरूप तेज, पारदर्शी और ग्राहक-केंद्रित हों। डिजिटल इंडिया के दौर में ग्राहक को घंटों लाइन में खड़ा करने के बजाय तकनीक का इस्तेमाल करके उसका समय बचाना ही सबसे बड़ा सुधार होगा।

करवाया गया है। वहीं पार्षद कटारिया का कहना है कि गणेश चतुर्थी से पहले बचे हिस्से में सड़क निर्माण और चौड़ीकरण का कार्य जल्द पूरा करवाने का प्रयास किया जा रहा है। यही नहीं लंबे समय से बंद काम दोबारा शुरू भी हो गया है। साथ ही बड़े हिस्से में सड़क बनकर तैयार भी हो गई है।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 1 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 8 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें