शहर में सालों से बकाया चल रहे कचरा शुल्क की वसूली के लिए नगर निगम ने अब सख्ती शुरू कर दी है। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के साथ ही भवन स्वामियों से कचरा शुल्क भी वसूला जाएगा। इसके लिए निगम ने राजस्व विभाग के 88 कर्मचारियों को अलग-अलग जोन और वार्ड में तैनात किया है। ये कर्मचारी कचरा गाड़ियों के साथ रहेंगे और संबंधित रूट पर आने वाले घरों की बकाया सूची लेकर चलेंगे। घर-घर पहुंचकर भवन स्वामियों को बकाया कचरा शुल्क जमा करने के लिए कहा जाएगा। दरअसल, बीती लोक अदालत में नगर निगम को कचरा शुल्क से महज 55 लाख रुपए का राजस्व मिला। इसके बाद निगम ने वर्षों से लंबित कचरा शुल्क की वसूली को लेकर अपना रुख सख्त किया है। निगम के अधिकारियों के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में शहर से करीब 50 करोड़ रुपए कचरा शुल्क वसूलने का लक्ष्य रखा गया है।
हर कचरा गाड़ी पर रहेगा वसूली कर्मचारी
राजस्व विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार 88 कर्मचारियों को अलग-अलग जोन और वार्ड में जिम्मेदारी दी गई है। इन कर्मचारियों को संबंधित कचरा गाड़ियों के साथ तैनात किया जाएगा। गाड़ी जिस रूट पर जाएगी, कर्मचारी के पास उस रूट के भवनों की कचरा शुल्क बकाया सूची भी रहेगी। इसके आधार पर मौके पर ही भवन स्वामियों से संपर्क कर शुल्क जमा कराने के लिए कहा जाएगा। निगम का मानना है कि कचरा कलेक्शन के लिए गाड़ी रोजाना घरों तक पहुंचती है, ऐसे में इसी व्यवस्था के साथ शुल्क वसूली करने से बकाया खातों की पहचान और वसूली दोनों आसान होगी।
जिनके खाते नहीं खुले, उनका भी होगा सर्वे
वसूली अभियान के दौरान ऐसे भवनों का भी सर्वे किया जाएगा, जहां एक ही खाते में कई किराएदारों को शामिल किया गया है। राजस्व विभाग के साथ समन्वय कर प्रत्येक किराएदार का अलग खाता खोलने की प्रक्रिया की जाएगी। यदि किसी भवन में बड़ी संख्या में किराएदार या व्यावसायिक गतिविधियां हैं तो उन्हें बल्क वेस्ट कलेक्शन की श्रेणी में रखने पर भी विचार किया जाएगा। इससे निगम के रिकॉर्ड में कचरा शुल्क देने वाले उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ेगी और वास्तविक कचरा उत्पादन के आधार पर शुल्क वसूली की व्यवस्था को प्रभावी किया जा सकेगा।
पहले स्वच्छता सर्वेक्षण की जरूरत भर की होती थी वसूली
नगर निगम में कचरा शुल्क वसूली को
लंबे समय से निष्क्रिय कर्मचारियों को भी लगाया मैदान में
निगरानी पर भी रहेगा।
लगातार कचरा नहीं देने वाले घरों की भी होगी जांच
देने वाले भवनों के संबंध में निगम की टीम जांच कर आगे की कार्रवाई करेगी। लेकर लंबे समय से प्रभावी अभियान नहीं चलाया गया। हर साल स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए आवश्यक राशि जुटाने पर अधिक ध्यान दिया जाता रहा। करीब 45 लाख रुपए की राशि वसूलने के बाद कचरा शुल्क की नियमित वसूली को लेकर अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई गई। इसका नतीजा यह हुआ कि कई भवन स्वामियों पर वर्षों से शुल्क बकाया होता गया। कई मामलों में न तो नियमित बिल पहुंचे और न ही निगम की ओर से बकाया जमा कराने के लिए प्रभावी तकाजा किया गया। अब निगम ने इसी लंबित राशि को राजस्व में बदलने की कवायद शुरू की है।
वसूली अभियान के लिए निगम ने ऐसे कर्मचारियों को भी जिम्मेदारी दी है, जिन्हें लंबे समय से मैदानी काम से दूर माना जा रहा था। निगम स्तर पर तैयार की गई सूची के बाद इन कर्मचारियों को अब कचरा गाड़ियों के साथ तैनात किया गया है। उन्हें वसूली का लक्ष्य भी दिया गया है। निगम अधिकारियों का फोकस केवल बकाया राशि वसूलने पर ही नहीं, बल्कि कचरा कलेक्शन व्यवस्था की
कचरा गाड़ियों के साथ तैनात कर्मचारी यह भी देखेंगे कि संबंधित रूट पर कितने घर नियमित रूप से कचरा गाड़ी में कचरा दे रहे हैं। यदि कोई घर लंबे समय से कचरा गाड़ी में कचरा नहीं डाल रहा है तो इसकी जानकारी जुटाई जाएगी। लगातार कचरा नहीं
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 23 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




