मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
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निगम के नामांतरण घोटाले को लेकर आयुक्त ने दिखाई सख्ती

3 अपर आयुक्त की कमेटी के द्वारा तेजी से की जा रही है घोटाले की जांच

इंदौर। नगर निगम के नामांतरण को लेकर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के द्वारा सख्ती दिखाई गई है। इस घोटाले की जांच 3 अपर आयुक्त की कमेटी के द्वारा तेजी से की जा रही है। ऐसा समझा जाता है कि इसी सप्ताह में यह कमेटी अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट्स दे देगी। नगर निगम का नामांतरण घोटाला पूरे प्रदेश स्तर पर चर्चित हो गया है। इस घोटाले में 356 व्यक्तियों की संपत्ति में मालिक के नाम बदल दिए गए। इसके साथ ही इसमें से 51 संपत्ति संबंधित नए मालिक के द्वारा बेच दी गई। यह हकीकत जांच कमेटी के सामने आ गई है। जांच कमेटी के द्वारा नोटिस देकर जिन लोगों के नाम पर संपत्ति का अंतरण किया गया है उन लोगों को बुलाकर पूछताछ करने का काम किया जा रहा है। निगम के अपर आयुक्त आकाश सिंह के द्वारा इन लोगों के साथ पूछताछ की जा रही है। हर दिन अलग-अलग 20 लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है। इस पूछताछ में बहुत ही महत्वपूर्ण तथ्य जांच कमेटी के सामने आ गए हैं। निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के द्वारा बताया गया कि इस घोटाले की जांच में किसी भी स्तर पर किसी आरोपी को बचाने की कोई कोशिश नहीं की जाएगी। जो भी दोषी हैं ऐसे हर दोषी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए नगर निगम तत्पर है। उन्होंने कहा कि जांच कमेटी के द्वारा अलग-अलग लोगों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज करने का काम किया जा रहा है। इस काम में हमारे पास में ऐसे तथ्य आ गए हैं जिससे कि यह मालूम पड़ता है कि यह काम किन लोगों के द्वारा करवाया गया है। इसमें निजी क्षेत्र के दलाल शामिल होने की जानकारी भी जांच कमेटी के समक्ष आ गई है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच के चलते हुए घोटाले के समय उपायुक्त रहे केशव सगर को कल उनके पद से हटा दिया गया है। उसके साथ ही उन्हें सेंट्रल स्टोर्स की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दूसरे उपायुक्त प्रदीप जैन को पहले से ही राजस्व विभाग से हटाया जा चुका है। इस घोटाले को लेकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव का रूख कड़क है। उनके द्वारा सोमवार को आयोजित की गई महापौर परिषद की बैठक के दौरान भी निगम आयुक्त को यह निर्देश दिया गया था कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जाए। उनके द्वारा दिए गए निर्देश का ही यह परिणाम था कि कल निगम आयुक्त के द्वारा सगर को इस विभाग से हटाया गया है। इस उपायुक्त को हटाने के लिए जब घोटाला उजागर हुआ था उसी समय से मांग की जा रही थी लेकिन अब तक इस मांग को आयुक्त नजरअंदाज कर रहे थे।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 22 जुलाई 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें