शहर के विकास कार्यों की प्लानिंग, डिजाइनिंग और मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी जिन कंसल्टेंट के पास थी, उन्हीं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद नगर निगम ने बड़ा फैसला लिया है। निगम ने अपने पैनल में शामिल 68 कंसल्टेंट को बाहर कर दिया है। अब नए कंसल्टेंट नियुक्त करने के लिए टेंडर जारी किए गए हैं। यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, साइट पर निगरानी और सरकारी राशि के उपयोग को लेकर जवाबदेही की जरूरत महसूस की जा रही है। सवाल यह भी है कि जब निगरानी की जिम्मेदारी कंसल्टेंट के पास थी, तो कामकाज में कमियां कैसे रह गईं?
मोटी फीस लेने के बाद भी नहीं किया काम
नगर निगम ने जनकार्य, ड्रेनेज सहित अन्य विभागों के सिविल कार्यों की डीपीआर तैयार करने, प्लानिंग, डिजाइनिंग, मॉनिटरिंग और सुपरविजन के लिए 68 कंसल्टेंट का पैनल बनाया था। इन्हें प्रोजेक्ट लागत का 3.60 प्रतिशत भुगतान किया जाता था। इसके बावजूद मौके पर निगरानी और कंसल्टेंट की मौजूदगी को लेकर सवाल उठे। अब निगम ने पुरानी व्यवस्था बदलकर नए सिरे से चयन की प्रक्रिया शुरू की है। इस फैसले से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर जवाबदेही तय करने की जरूरत फिर सामने आई है।
50 करोड़ तक के कामों के लिए अलग श्रेणियां
नई व्यवस्था में तीन करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट के लिए अलग प्रावधान रहेगा। वहीं, 3 से 5 करोड़, 5 से 15 करोड़, 15 से 25 करोड़ और 25 से 50 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंट का अनुभव और उसकी फीस महत्वपूर्ण होगी। प्रतिस्पर्धा के आधार पर चयन कर बड़े प्रोजेक्ट के लिए अनुभवी कंसल्टेंट नियुक्त करने और खर्च नियंत्रित करने की कोशिश की जाएगी।
डीपीआर से सुपरविजन तक होगी जिम्मेदारी
जनकार्य विभाग के प्रभारी रिffजेंद्र राठौर के अनुसार, पुराने 68 कंसल्टेंट को हटाकर नए कंसल्टेंट नियुक्त करने के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। नई व्यवस्था में डीपीआर तैयार करने से लेकर डिजाइनिंग और निर्माण कार्यों के सुपरविजन तक की जिम्मेदारी कंसल्टेंट निभाएंगे। हालांकि, नई नियुक्तियों के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि कंसल्टेंट केवल कागजों पर नहीं, बल्कि मौके पर मौजूद रहकर काम की गुणवत्ता की निगरानी करें। शहर के विकास कार्यों में जनता के पैसे का सही उपयोग और समय पर काम पूरा कराना निगम के सामने बड़ी चुनौती है।
1. 68 कंसल्टेंट बाहर: नगर निगम ने पुराने पैनल को समाप्त कर नए चयन की प्रक्रिया शुरू की।
2. 3.60³ फीस पर सवाल: प्रोजेक्ट लागत के अनुपात में भुगतान के बावजूद निगरानी पर सवाल उठे। 3. 50 करोड़ तक के प्रोजेक्ट: अलग-अलग लागत श्रेणियों में नए कंसल्टेंट नियुक्त होंगे।
4. अनुभव और फीस अहम: चयन में कंसल्टेंट की योग्यता, अनुभव और दर को महत्व दिया जाएगा।
5. जवाबदेही की चुनौती: डीपीआर से सुपरविजन तक जिम्मेदारी निभाने के साथ निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना होगा।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 12 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 5 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




