इस बार बारिश ने दगा दिया तो अब शहर में तालाबों में बची पानी की हर बूंद को सहेजने की चुनौती खड़ी हो गई है। जिले में औसत बारिश के मुकाबले इस वर्ष आधे से भी कम पानी बरसा है। इसका सीधा असर जलस्रोतों पर दिखाई दे रहा है। आने वाली गर्मियों में जल संकट गहराने की आशंका के बीच नगर निगम ने अब तालाबों में बचे पानी को बचाने की कवायद शुरू कर दी है। यशवंत सागर और सिरपुर तालाब में फैली जलकुंभी हटाई जाएगी, ताकि कुमार भास्कर के अनुसार, यशवंत सागर में वर्तमान में जितना पानी उपलब्ध है, उसे दूषित होने से बचाने के लिए जलकुंभी और अन्य अवांछित तत्व हटाए जाएंगे। तालाब के बड़े हिस्से में जलकुंभी फैल चुकी है। इसे हटाने के लिए दो मशीनें लगाई जाएंगी। निगम यह स्पष्ट है कि नए जलस्रोत मिलने तक पुराने जलस्रोतों में बची हर बूंद को बचाना होगा। तालाबों की जलकुंभी हटाने की कार्रवाई इसी बड़े संकट से पहले की जा रही तैयारी का हिस्सा है।
ओवरफ्लो नहीं हुआ तो बोरिंग ने साथ छोड़ा तो संकट तालाबों में जम गई जलकुंभी तेजी से गहराएगा
निगम अधिकारियों के मुताबिक, हर साल नगर निगम की चिंता सिर्फ तालाबों तक सीमित नहीं है। बारिश के दौरान तालाब ओवरफ्लो होने पर शहर में भूजल स्तर गिरने और बोरिंग के जवाब देने की पानी के बहाव के साथ जलकुंभी भी बाहर स्थिति पर भी नजर है। अधिकारियों का कहना है कि निकल जाती थी। इससे तालाब का पानी यदि आगामी नवरात्रि के दौरान दो-तीन अच्छी बारिश हो अपेक्षाकृत साफ रहता था। इस बार कम जाती है तो भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद है और बारिश के कारण तालाब ओवरफ्लो नहीं गर्मियों तक बोरिंग से पानी मिलने की संभावना बनी रह हुए और जलकुंभी वहीं फैलती चली गई।
सकती है। फिलहाल नर्मदा से शहर को प्रतिदिन पर्याप्त अब यही जलकुंभी तालाब के बचे पानी पानी मिल रहा है, लेकिन भविष्य की जरूरत को देखते की गुणवत्ता के लिए चुनौती बन रही है।
हुए पानी बचाने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 4 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




