महापौर पुष्यमित्र की परिषद का कार्यकाल आगामी 5 अगस्त 2026 को 4 साल का हो जाएगा, अब परिषद खत्म होने में लगभग 10 माह का समय बचा हुआ है, ऐसी स्थिति में 85 वार्ड के पार्षद अपने बचे हुए काम तेजी से पूरे करवाना चाहते हैं। जोन कार्यालय से हर दिन फाइल बनवाई जा रही है, अधिकारी वर्तमान समय में चौतरफा दबाव में है। वार्ड के ऐसे ऐसे काम खोजे जा रहे हैं जिनको करने की कभी प्लानिंग नहीं की गई लेकिन पार्षदों को अपना कार्यकाल खत्म होता हुआ सामने दिखाई दे रहा है ऐसी स्थिति में कोई भी काम जो बकाया है या जिनकी डिमांड नहीं है वह भी पूरे करने का प्रयास किया जा रहा है सबसे अधिक जनकार्य, ड्रेनेज, उद्यान विभाग की फाइल साइन हो रही है इधर पार्षदों का फोकस इन विभागों पर ही है, क्योंकि यही सबसे अधिक कमाई वाले विभाग हैं। इधर बिल्डिंग परमिशन मैं बड़े नक्शों को तेजी से स्वीकृत करने के लिए पार्षद जोड़ डाल रहे हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव अपने कार्यकाल के 4 वर्ष जल्द ही पूरे कर लेंगे। इस दौरान उनकी उपलब्धियां की फेरीस्ट लंबी है। इस दौरान उन्होंने कई जोखिम उठाने वाले कार्य भी किए हैं केवल, यह काम जनता के लिए कड़वी दवा की तरह थे जिसको कोई पीना नहीं चाहता था लेकिन शहर में बढ़ते आबादी के दबाव के चलते मूलभूत इंप्रास्ट्रक्चर पर काम करना जरूरी था। जिस तरह से पूरे शहर में नर्मदा और ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने के लिए नई लाइनें डाली गई। इसके लिए कई किलोमीटर तक खुदाई की गई और जनता का विरोध महापौर को झेलना पड़ रहा है। इसके अलावा अमृत योजना के विकास कार्य जलूद में आरंभ कर दिए गए। यह महापौर की बड़ी उपलब्धियां में से एक है जिसमें 2029 तक नर्मदा के चौथे चरण से इंदौर में कुल 900 एमएलडी पानी लाना है।
से बिजलपुर तक 80
का काम शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा जलूद में
मास्टर प्लान की सड़कों का निर्माण महापौर के खाते की बड़ी उपलब्धियां हैं, यह ऐसे
चाहता था क्योंकि जनता का विरोध सीधे तौर पर इसमें महापौर को झेलना पड़ा है।
के अनुसार पिछले 2 माह में लगभग 300 कऱोड़ रुपए के
चुकी है इसके अलावा जोन कार्यालय से 200 करोड़ की फाइलें मुख्यालय आना बाकी है। इन फाइलों में सबसे अधिक सड़क निर्माण ड्रेनेज लाईन बदलने, फुटपाथ और सौंदर्यीकरण, यातायात विभाग, जनकार्य और बिल्डिंग परमिशन की फाइलें शामिल है। लेखा विभाग के अनुसार 1000 करोड़ के विकास कार्यों को स्वीकृति दी जा चुकी है लेकिन बजट कहां से आएगा फिलहाल इसको लेकर कोई बात नहीं की गई है, नगर निगम के रूटीन खर्च पर पूरी आए खत्म हो रही है, ऐसे में जो पार्षद फाइल बना रहे हैं। वह 10 माह से है पहले सड़के बनाई जाती है फिर सड़कें को दी जाती हैं। जनता के हिस्से में केवल परेशानी और समस्या ही आती है किसी भी काम को प्लानिंग के अनुसार नहीं किया जाता की उसे पर आने वाले 10-20 सालों तक कोई समस्या नहीं हो, बार- बार फाइनल तैयार करवाना यह केवल पार्षदों के स्वयं का हित है, शहर की सड़कें सड़के खुली हुई है यहां पाइपलाइन ने डाली जा रही है तो नगर निगम को यह पहले पता नहीं था अब अच्छी सड़के बनने के बाद नहीं लाइन डाली जा रही है, विभागों में प्लानिंग और समन्वय दोनों की कमी है जब तक यह दूर नहीं होगी तब तक विकास कार्य जनता के किसी काम के नहीं है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 22 जुलाई 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




