दुग्ध संघ के पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस नेता मोतीसिंह पटेल ने इंदौर जिले की देपालपुर विधानसभा के ग्राम सगड़ोद से निकल रही चम्बल नदी में जहरीला पानी उद्योगों द्वारा छोड़ा गया, जिससे हजारों मछलियां और जल जीव मर गए। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। पटेल ने कहा कि चम्बल नदी में पीथमपुर, धार की फैक्ट्रियों द्वारा यह जहरीला केमिकल युक्त पानी छोड़े जाने से नदी में परेशानी पैदा हुई है और नदी के पानी का कलर भी बदल गया है। बड़ी संख्या में मछलियां और जल जीव मृत होकर किनारे पर दिखाई दे रहे हैं। इस मामले में मोतीसिंह पटेल ने कहा कि शासन और प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करें, नहीं तो उग्र आन्दोलन करने की चेतावनी मोतीसिंह पटेल ने दी है। नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों में भी इस घटना से आक्रोश है। यहीं के नरेन्द्र मकवाना ने बताया कि इस चम्बल नदी का पानी उद्योगों द्वारा दूषित पानी छोड़ने के बाद मवेशियों के भी पीने योग्य पानी नहीं बचा है, नदी में बह रहे पानी की दुर्गन्ध से बहती नदी के आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी हो रही है। यह पानी बोरिंगों में भी उतर सकता है इसकी आशंका के साथ रहवासियों ने जमकर आक्रोश जताया। किसान नेता मोतीसिंह पटेल ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि तत्काल उद्योगों का जहरीला पानी नदी में आने से रोका जाए। नदी के पानी का सेम्पल लेकर जांच कराई जाए। नदी में जहरीला पानी छोड़ने वाली कंपनियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। मृत मछलियों और जीवों का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से करवाया जाए ताकि बीमारी न फैले। मोती सिंह पटेल ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की गई और दोषियों पर एफआईआर दर्ज नहीं हुई तो कांग्रेस मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में उग्र आंदोलन किया जाएगा। आंदोलन की संपूर्ण जवाबदारी शासन-प्रशासन और प्रदूषण फैलाने वाली कंपनीयो की होगी। कुल मिलाकर अब देपालपुर से बह रही चम्बल नदी का मुद्दा कांग्रेस नेता ने रहवासियों के माध्यम से उठाया है और मामला पीथमपुर के उद्योगपतियों द्वारा छोड़े गए पानी से जुड़ा है। इधर रहवासियों ने भी कहा कि वे पानी की बदबू से परेशान है। इसलिए अब आन्दोलन की आवश्यकता नजर आ रही है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 1 अगस्त 2026 के अंक में पृष्ठ 2 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




