ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय जूडोकाओं का शानदार प्रदर्शन जारी है। अस्मिता डे और हर्ष सिंह के ऐतिहासिक स्वर्ण पदकों के बाद यामिनी मौर्य ने महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर भारत के मेडल अभियान को और आगे बढ़ाया। अपने पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा ले रही 28 साल की यामिनी ने शुरुआत से ही बेहतरीन प्रदर्शन किया और पॉडियम तक पहुंचकर देश की झोली में एक और कीमती पदक डाल दिया।
महिलाओं के 57 किग्रा श्रेणी का फाइनल मुकाबला बेहद कड़ा और रोमांचक रहा। यामिनी और इंग्लैंड की एसिल्या तोप्राक के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। निर्धारित समय तक दोनों ही खिलाड़ी कोई निर्णायक अंक हासिल नहीं कर सकीं, जिसके बाद मैच गोल्डन स्कोर में चला गया। गोल्डन स्कोर में दोनों खिलाड़ियों पर दबाव साफ दिख रहा था और दोनों को 2-2 शिदो पेनल्टी मिल चुकी थीं। यामिनी ने मजबूत बचाव जारी रखा, लेकिन तीसरी शिदो पेनल्टी मिलते ही मुकाबला समाप्त हो गया और इप्पोन नियम के तहत तोप्राक ने गोल्ड मेडल हासिल कर लिया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर यामिनी का लगातार शानदार प्रदर्शन
कॉमनवेल्थ गेम्स में डेब्यू करते हुए सिल्वर मेडल जीतना यामिनी के करियर की एक और बड़ी उपलब्धि है। इस साल की शुरुआत में डकार में आयोजित अप्रीकन ओपन में गोल्ड मेडल जीतने के बाद वे बेहतरीन फॉर्म में ग्लासगो पहुंची थीं। इससे पहले साल 2025 में उन्होंने हांगकांग एशियन ओपन में गोल्ड और होनियारा पैसिफिक गेम्स में सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। इसके अलावा, वे 2023 के इघ्एU वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स और 2015 एशियन अंडर-18 चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी जीत चुकी हैं।
भारतीय जूडो के लिए स्वर्णिम साबित हुआ ग्लासगो
नेशनल लेवल पर जूनियर और सीनियर वर्ग में कई स्वर्ण पदक जीत चुकीं यामिनी मौर्य का यह रजत पदक उनके करियर में मील का पत्थर साबित होगा। इस पदक ने ग्लासगो 2026 में भारतीय जूडो दल के ऐतिहासिक और अब तक के सबसे सफल अभियान पर मुहर लगा दी है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 1 अगस्त 2026 के अंक में पृष्ठ 11 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




