संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ सैकड़ों मैथिल एवं पूर्वोत्तर समाज की महिलाओं ने कल नहाय-खाय की परंपरा के साथ जितिया (जीवित्पुत्रिका) महाक्रत की शुरुआत की। क्रती महिलाओं ने स्नान आदि कर शुद्धता के साथ सात्विक भोजन ग्रहण किया। मैथिल समाज की महिलाओं ने भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना की। मिथिला की परंपरा के अनुसार झिमनी (तोरई) के पत्ते पर सरसों का तेल और खैर यानी सरसों की खल्ली अर्पित की गई। इसके बाद चूड़ा-दही और मिष्ठान का भोग लगाया गया तथा प्रसाद परिवार के सदस्यों में वितरित किया गया। नहाय-खाय के अवसर पर शाम को मैथिल परिवारों में पारंपरिक भोजन तैयार किया गया। कई परिवारों में मरुआ (रागी) की रोटी के साथ मछली बनाई गई। वहीं वैष्णव परंपरा का पालन करने वाली महिलाओं ने झिमनी की सब्जी और नोनी के साग के साथ मरुआ की रोटी ग्रहण की। आज माताओं ने जितिया का निर्जला क्रत रखा है। आज सुबह उठकर स्नान और नित्यकर्म से निवृत्त होने के बाद पूजा-अर्चना कर क्रत का संकल्प लिया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला क्रत के दौरान अन्न और जल का सेवन नहीं किया जाता।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 3 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 7 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




