आखिरकार भाजपा में वापसी के करीब 23 दिनों बाद पूर्व एमआईसी सदस्य जीतू यादव की नियुक्ति महापौर परिषद में शुक्रवार देर रात हो ही गई। भारी राजनीतिक दबाव प्रभाव में यह काम भोपाल के आदेश पर हुआ। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बहुत ही गोपनीय तरीके से अपने विदेश दौरे से पहले इस काम को पूरा किया। देर रात जब वे फ्लाइट में चढ़ गए उसके बाद जीतू यादव की नियुक्ति का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ इसके बाद दो नंबर विधानसभा में जश्न का माहौल बन गया। 18 अगस्त को जब जीतू यादव की भाजपा में वापसी हुई थी उसी दिन वापसी के पहले उनका एमआईसी विभाग निरंजनसिंह चौहान की एमआईसी में वापसी मुश्किल है लेकिन कल रात भोपाल से हरी झंडी मिलने के बाद जीतू की एमआईसी में वापसी हो गई। निरंजन को जीतू का विद्युत विभाग मिलने के बाद कई लोग पचा नहीं पा रहे थे, अंदरुनी नाराजगी भी इसको लेकर थी, इसलिए जीतू को वापस अपना विभाग मिलने की राह आसान हो गई थी। दूसरी ओर जीतू के लिए विधायक रमेश मेंदोला और विधायक गोलू शुक्ला भी प्रयास कर रहे थे। पूरे मामले में खास बात यह रही कि कल जीतू की पुनः नियुक्ति का पत्र तब जारी हुआ जब महापौर अपनी विदेश यात्रा के लिए रवाना हो गए थे। सवाल यह भी है कि क्या महापौर जीतू की वापसी पर मीडिया का सामना करना नहीं चाहते थे। दूसरी ओर विधानसभा चार का गुट भी नहीं चाहता था कि जीतू की वापसी हो, क्योंकि मामला विधानसभा चार के ही पार्षद कमलेश कालरा के निवास पर हुए हमले के बाद शुरू हुआ था। अब इस मामले में यह भी सामने आया है कि पांच दिन पूर्व सोशल मीडिया पर एक सूचना का प्रचार हुआ था जिसमें बताया गया था कि जीतू यादव ने अपने सोशल मीडिया से पार्टी का लोगो और नाम हटा दिया और खुद को सामान्य पार्षद और जनसेवक बताया। अब माना जा रहा है कि जीतू की वापसी में सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई खबर अहम रही है। हालाकि जीतू ने सोशल मीडिया से पार्टी का लोगो या नाम हटाया था या नहीं इसकी पुष्टि नहीं हुई लेकिन इस घटनाक्रम को इस मामले में गुगली के रूप में देखा जा रहा है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 12 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 3 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




