दो दिन पहले जैन समाज के संत के निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार सार्वजनिक बगीचा में किया गया था वह मामला चर्चा में बन गया था। इस मामले में निगम आयुक्त ने भी अंतिम संस्कार को गलत बताकर कहा था कि इस मामले में जांच कराई जा रही है। अभी इस मामले में कोई जांच रिपोर्ट नहीं आई है और इधर जैन समाज के प्रवक्ता की भूमिका निभाने वाले राजेश जैन दद्दू ने जैन समाज की ओर से मांग की है कि समग्र जैन संतों के अंतिम संस्कार के लिए इंदौर में स्थाई भूमि आरक्षित की जाए।
जैन संत के निधन के बाद अंतिम संस्कार के स्थान की व्यवस्था चुनौती बन जाती है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि जैन परंपरा के अनुसार सामान्य श्मशान में नहीं होती है। जैन ने इंदौर ही नहीं बल्कि भोपाल, जबलपुर, सागर, अशोक नगर, गुना में जैन संत के अंतिम संस्कार के लिए स्थाई भूमि की मांग की है। राजेश जैन ने बताया कि राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन समाजिक सांसद एवं सकल जैन समाज के राकेश गोहिल, मंयक जैन, फेडरेशन मनोहर झांझरी, नवीन गोधा ने कहा कि जैन संतों के देहावसान के पश्चात अंतिम क्रिया हेतु उपयुक्त स्थान की व्यवस्था करना समाज के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन ने कहा कि जैन परंपरा के अनुसार संतों का अंतिम संस्कार सामान्य श्मशान घाट पर नहीं किया जाता। इसके लिए पवित्र, एकांत एवं गरिमामयी स्थान आवश्यक होता है। पूर्व में भी इंदौर में अनेक बार इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है, जब अंतिम क्रिया के लिए स्थान खोजने में कठिनाई आई थी। मयंक जैन ने कहा कि संत के निधन के बाद तात्कालिक रूप से भूमि की व्यवस्था करना पड़ती है, जिससे काफी प्रशासनिक दिक्कतें आती है। धार्मिक विधि विधान से अंतिम संस्कार को सम्पन्न करने में भी बाधा उत्पन्न होती है। इसीलिए समग्र जैन समाज ने शासन-प्रशासन से आग्रह किया है कि महानगरों में जैन संतों के अंतिम संस्कार हेतु एक स्थायी 'संस्कार भूमि' आरक्षित सरकार द्वारा या प्रशासन द्वारा दी जाए। इससे भविष्य में किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सकेगा और जैन परंपराओं के अनुसार सम्मानपूर्वक अंतिम क्रिया सम्पन्न हो सकेगी। दद्दू ने कहा कि समंग्र जैन समाज का मानना है कि जिस प्रकार अन्य धर्मों एवं संप्रदायों के लिए अलग-अलग श्मशान/ कब्रिस्तान की व्यवस्था है, उसी प्रकार जैन धर्म संस्कृति के हिसाब से साधु-संतों की विशेष परंपरा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा शीघ्र भूमि आवंटित की जानी चाहिए। वर्तमान में चल रहे शहर में अनेक जगह वर्षायोग सेवा समिति ने कहा है कि इस विषय पर शीघ्र निर्णय लिया जाए, ताकि भविष्य में आने वाली पीढ़ियों को इस समस्या का सामना न करना पड़े।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 14 अगस्त 2026 के अंक में पृष्ठ 5 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




