आचार्य नित्यसेन सूरिश्वर म.सा. दो दिन पहले गुमास्ता नगर में जन्मवाचन करके केशरी वाटिका के लिए प्रस्थान कर रहे थे, तभी 90 वर्षीय महासती रमणिककुंवर दमू म.सा. और उनकी शिष्याओं ने आचार्य से मिलने की इच्छा जाहिर की। आचार्य और मुनिश्री विद्वदरत्न विजयजी, मुनिश्री आध्यात्मसेन विजयजी आदि ठाणा-3, स्कीम नं. 71 स्थित न्यू जैन साधना भवन पहुंचे। उनकी अगवानी की गई। जैन समाजजन और वरिष्ठ साध्वी और उनकी शिष्याओं ने गुरुदेव का स्वागत किया। महासतीजी ने लगभग 50 वर्ष पूर्व पुण्य सम्राट एवं दादा गुरुदेव यतीन्द्र सूरीजी के साथ हुई धार्मिक चर्चाओं के संस्मरण सुनाए। वहीं आचार्य श्री ने महासतीजी के गुरु सौभाग्यमलजी से जुड़े कई पुराने प्रसंगों का स्मरण किया। दोनों परम्पराओं के संतों के बीच हुए इस आत्मीय संवाद ने वातावरण को भावविभोर कर दिया। कई जैन कीर्तन के दौर चले वह सुबह तक चलते समाजजनों की आंखों से श्रद्धा के आंसू भी बह निकले।
सितम्बर माह में रतलाम, सैलाना और आसपास के क्षेत्र से बालम ककड़ी का आना शुरू हो जाता है। गंगवाल बस स्टैण्ड से एमओजी लाइन और बियाबानी रोड पर लगी ककड़ी की दुकानों पर यह ककड़ी मिल रही है। अभी 100 रु. से लेकर 120 रु. किलो तक यह ककड़ी मिल रही है। लोग शौक से ककड़ी ले जा रहे हैं, लेकिन अभी थोड़े से टेस्ट में खटास और मिठास में कमी दिख रही है। इस कड़ी की खासियत होती है कि इसमें हलका खार भी होता है
रघुवंशी सहित अन्य मौजूद थे।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 15 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 6 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




