नगर निगम में एक के बाद एक वित्तीय अनियमितताओं के मामले सामने आने से निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। फर्जी नामांतरण घोटाले के बाद अब मस्टर कर्मचारियों के वेतन से जुड़ा फर्जी बैंक अकाउंट घोटाला उजागर हुआ है। इस मामले में स्थापना शाखा और लेखा विभाग से जुड़े कर्मचारियों की मिलीभगत से पांच कर्मचारियों के बैंक खातों में बदलाव कर करीब तीन लाख रुपये का वेतन फर्जी खातों में ट्रांसफर कर गबन किए जाने का मामला सामने आया है। घटना का खुलासा तब हुआ जब वेतन भुगतान के लिए तैयार की गई एनईएफटी ब्लास्ट फाइल बैंक में फेल हो गई। इसके बाद लेखा विभाग ने जांच की तो पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ।
पांच कर्मचारियों के वेतन में मिली गड़बड़ी
लेखा विभाग द्वारा मस्टर कर्मचारियों के वेतन भुगतान की जांच के दौरान पाया गया कि पांच कर्मचारियों के वास्तविक बैंक खातों की जगह सिस्टम में नए खाते दर्ज कर दिए गए थे। इन्हीं अनधिकृत खातों में वेतन की राशि स्थानांतरित की गई। प्रारंभिक जांच में करीब तीन लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। माना जा रहा है कि यदि बैंक की एनईएफटी प्रक्रिया फेल नहीं होती तो यह फर्जीवाड़ा लंबे समय तक पकड़ में नहीं आता। प्रकरण में प्रधान कार्यालय (स्थापना शाखा) में कार्यरत उच्च कुशल श्रमिक अमन सालवी को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए उसकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। उसका पारिश्रमिक रोकने के साथ कर्मचारी आईडी भी लॉक कर दी गई है। वहीं आईटी विभाग में आउटसोर्स कर्मचारी अनुज पंवार की भूमिका भी संदिग्ध पाए जाने पर उसकी सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं। दोनों की भूमिका की विस्तृत जांच की जा रही है।
एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश
नगर निगम आयुक्त क्षितिज ने मामले को गंभीर सिंघल वित्तीय अपराध मानते हुए स्पष्ट किया कि निगम में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के लिए किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने दोनों आरोपित कर्मचारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। आयुक्त ने यह भी कहा कि यदि जांच में अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
वेतन मामले में जांच समिति का गठन
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए निगम आयुक्त ने पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति के अध्यक्ष अपर आयुक्त अभय
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 25 जुलाई 2026 के अंक में पृष्ठ 8 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




