मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
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इंदौर नगर निगम में बड़े बड़े खेल चल रहे हैं और खास तौर पर संपत्ति कर विभाग में

इसमें भी सबसे बदनाम झोन हवा बंगला झोन में जहां विदुर नगर में मूल संपत्ति स्वामी का नाम रजिस्ट्री होने के वावजूद नहीं चढ़ाया जाता और नकली लोगों का नाम…

इसमें भी सबसे बदनाम झोन हवा बंगला झोन में जहां विदुर नगर में मूल संपत्ति स्वामी का नाम रजिस्ट्री होने के वावजूद नहीं चढ़ाया जाता और नकली लोगों का नाम चढ़ाया जाता है। करीब 65 से अधिक मामलों में ऐसा हुआ है फिर एक मामला चर्चित है। सन् 1971 में 718 नंबर का 3000 फुट का प्लाट मंगलाबाई एवं रूपकुमार पांजरे ने खरीदा। दोनों ने आधा आधा हिस्सा बांट लिया। मनोरमा बाई का 718-ए तो रूप कुमार का 718-बी नगर निगम का जमीन के जादुगरों के साथ खेल शुरू हुआ और रूप कुमार पांजरे के प्लाट पर किसी और का नाम चढ़ा दिया। जब रूप कुमार की मृत्यु हुई तो उनकी पत्नी मानसिक रूप से अस्वस्थ, पुत्र एवं एक अन्य पुत्र नगर निगम कार्यालय पहुंचे। किसी राम कृष्ण पिता रधुनाथ जाधव का नाम चढ़ा मिला फिर चन्दनबाई पति रघुनाथ कर दिया। कांता बाई पति रूपकुमार पांजरे एवं ईश्वर तथा योगेन्द्र ने रजिस्ट्री पेश की तथा चन्दनबाई ने शपथ-पत्र दिया कि उनका इस संपत्ति के खाते में गलत नाम चढ़ाया गया है, ना तो हमारा प्लाट है, ना हमारा कब्जा, ना हमारी आपत्ति, बावजूद नगरनिगम अधिकारियों पर किसका दबाव है कि नाम हटा नहीं रहें। कांता बाई अपने मानसिक रूप से अस्वस्थ पुत्र एवं बड़े पुत्र को लेकर झोन, मुख्य कार्यालय चक्कर काट-काट थक गई। अभिभाषक प्रमोद कुमार द्विवेदी के दफ्तर अपने बच्चे को लेकर कांताबाई पहुंची, तो उन्होंने तत्काल महापौर, आयुक्त, तथा अपर आयुक्त को मय दस्तावेज, शपथ-पत्र तथा मृत्यु प्रमाण-पत्र सहित आपत्ति लगाने की सलाह दी और आवश्यक दस्तावेज बनवाये। सबसे अहम् जिसका नाम चढ़ाया गया वो खुद नाम हटवाना चाहता है कि लोभ लालच में कोई नकली चन्दनबाई बनकर खेल ना कर दे।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 29 जुलाई 2026 के अंक में पृष्ठ 3 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें