सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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संपादकीय शिक्षकों की कमी से कैसे सुधरेगी शिक्षा की गुणवत्ता? यूनेस्को की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता यू

नेस्को की ओर से 5 अक्टूबर 2026 को जारी की गई रिपोर्ट में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि शिक्षण का पेशा जलवायु परिवर्तन, विस्थापन और शिक्षकों…

नेस्को की ओर से 5 अक्टूबर 2026 को जारी की गई रिपोर्ट में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि शिक्षण का पेशा जलवायु परिवर्तन, विस्थापन और शिक्षकों के अभाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। बच्चे देश का भविष्य होते हैं और उनके वर्तमान को संवारने का जिम्मा शिक्षकों के हाथ में होता है। शिक्षक का दायित्व विद्यार्थियों को पढ़ाना, उनकी समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान करना और व्यक्तित्व का निर्माण करना है। ऐसे में शासन की भी जिम्मेदारी बनती है कि शिक्षा व्यवस्था में समय की मांग के अनुरूप नियमित तौर पर सुधार किए जाएं और शिक्षक-शिक्षार्थी के लिए विद्यालयों में हर तरह से अनुकूल वातावरण बनाया जाए। मगर मौजूदा परिस्थितियों पर गौर करें, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि राष्ट्र निर्माण को गति देने वाला शिक्षा का क्षेत्र शासन की नजर-ए-इनायत के लिए क्यों तरस रहा है? यूनेस्को की ओर से बीते सोमवार को जारी की गई रिपोर्ट में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि शिक्षण का पेशा जलवायु परिवर्तन, विस्थापन और शिक्षकों के अभाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में वर्ष 2030 तक सभी बच्चों की शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए दुनिया को पांच करोड़ अतिरिक्त शिक्षकों की जरूरत है। इसमें दोराय नहीं कि शिक्षकों की लगातार कमी तथा मौजूदा शिक्षकों को अतिरिक्त कार्य सौंपे जाने से उनकी मुश्किलें और उनसे अपेक्षाएं दोनों बढ़ती जा रही हैं। भारत की बात की जाए, तो यहां सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को समय-समय पर कई गैर-शैक्षणिक कार्य भी सौंप दिए जाते हैं। इसका असर न केवल शिक्षकों के कामकाज पर, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। आपदा या विशेष परिस्थितियों में ऐसी जिम्मेदारियां आवश्यक हो सकती हैं, लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब इन कार्यों की अधिकता शिक्षण के काम को प्रभावित करने लगे। वर्ष 2024-25 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में एक लाख से ज्यादा स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक तैनात है। ऐसे में अगर उन्हें गैर-शिक्षण कार्य भी थमा दिया जाए, तो शिक्षा की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षक को पर्याप्त समय और संसाधन मुहैया कराना जरूरी है। जब शिक्षक का अधिकतम समय विद्यार्थियों को मिलेगा, तभी विद्यालयों में सीखने का वातावरण बेहतर बनेगा और शिक्षा अपने वास्तविक उद्देश्य को हासिल कर सकेगी।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 7 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें