इंदौर। शहर में संभावित जल संकट से निपटने के लिए सरकार ने नगर निगम को भरपूर आर्थिक मदद देने का भरोसा दिया है। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बैठक में कहा कि संकट दूर करने के लिए जितनी राशि मांगी जाएगी, सरकार उतनी मदद देने को तैयार है। उन्होंने यहां तक कहा कि नगर निगम 50 करोड़ रुपए मांगेगा तो सरकार 100 करोड़ रुपए देने को तैयार है। लेकिन इसी बैठक में जब नए पानी के टैंकर खरीदने के लिए 50 करोड़ रुपए की मांग उठी, तो निगम को लोन लेने की सलाह दे दी गई। ऐसे में सरकार की आर्थिक मदद के भरोसे और जमीनी जरूरतों के बीच का अंतर चर्चा का विषय बन गया।
50 करोड़ की मांग, महापौर ने भी किया समर्थन- बैठक में एमआईसी सदस्य अभिषेक बबलू शर्मा ने जल संकट से निपटने के लिए नए पानी के टैंकर खरीदने हेतु 50 करोड़ रुपए तत्काल जारी करने की मांग रखी। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा कि मौजूदा टैंकर पुराने हो चुके हैं और जल आपूर्ति के लिए नए टैंकरों की जरूरत है।
मदद का भरोसा, टैंकरों के लिए लोन का सुझाव- टैंकर खरीदने के लिए राशि की मांग पर मंत्री विजयवर्गीय ने नगर निगम को लोन लेकर टैंकर खरीदने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि अब निगम को आसानी से ऋण मिल सकता है। वहीं बैठक में एक सवाल खड़ा होता है—जब सरकार जरूरत के मुताबिक आर्थिक सहायता देने को तैयार है, तो जरूरी संसाधन जुटाने के लिए निगम को कर्ज लेने की राह क्यों सुझाई जा रही है?
जनता को समझनी होगी पानी की कीमत- मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि इंदौर तक नर्मदा का पानी लाना आसान नहीं है। इसके लिए बड़ी लागत और संसाधनों की जरूरत होती है। इसलिए नागरिकों को पानी की कीमत समझनी होगी और इसकी बर्बादी रोकनी होगी। उन्होंने लोगों से जल संरक्षण के प्रति जागरूक होने की अपील की।
आखिर राहत कैसे मिलेगी?- जल संकट से निपटने के लिए सरकारी सहायता, नगर निगम की तैयारियों और नागरिकों की भागीदारी—तीनों की जरूरत है। आर्थिक मदद के भरोसे के बीच अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि टैंकरों की खरीद के लिए राशि कब और कैसे उपलब्ध होती है। फिलहाल संदेश साफ है: पानी बचाने की जिम्मेदारी सरकार और नगर निगम के साथ जनता को भी निभानी होगी।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 16 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 5 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें





