सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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इंदौर के भागीरथपुरा हादसे पर सरकार का बड़ा फैसला

अब पूरे प्रदेश में जमीन के अंदर रोबोट उतरेंगे और करेंगे पानी, ड्रेनेज लाइन की जांच

वर्ष 2025 के दिसंबर के महीने में भागीरथपुरा में हुए दूषित जल हादसे में 36 लोगों की मौत हो जाने के मामले को देखते हुए राज्य सरकार के द्वारा अब बड़ा फैसला लिया गया है। इस फैसले के तहत अब पूरे प्रदेश में जमीन के अंदर रोबोट उतरेंगे और पानी तथा ड्रेनेज की लाइन की जांच का काम करेंगे। इसके लिए राज्य सरकार के द्वारा एक एजेंसी के साथ 1 साल का एग्रीमेंट किया गया है। यह एजेंसी इंदौर सहित पूरे प्रदेश में काम करेगी।

भागीरथपुरा में दूषित पानी से 36 मौतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने पेयजल और सीवर लाइनों के घालमेल की जांच के लिए रोबोटिक निरीक्षण कराने का फैसला लिया है। हाल ही में प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को 70 से 900 मिमी व्यास वाली पानी और सीवर पाइपलाइनों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए चेन्नई की एक विशेषज्ञ एजेंसी को एम्पैनल किया गया है। एजेंसी 40 रुपए प्रति मीटर की दर से पाइपलाइनों की जांच करेगी। नगरीय प्रशासन विभाग ने इसके लिए एजेंसी से एक साल का एग्रीमेंट किया है।

इंदौर में है 30000 खतरनाक पॉइंट

दिसंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में भगीरथपुरा में दूषित पेयजल से 36 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में पीने के पानी में मानव मल से जुड़े बैक्टीरिया मिले। सीवर लाइन लीक होने से उसका पानी पेयजल लाइन में मिल गया था। जब जांच की गई तो अकेले भगीरथपुरा में ऐसे 260 पॉइंट्स मिले, जहां सीवर का पानी पेयजल में मिल रहा था। इस हादसे के बाद सरकार ने जीआईएस प्लेटफॉर्म 'गरुड़' से पूरे प्रदेश की मैपिंग कराई। इसमें मध्य प्रदेश में 2.30 लाख से अधिक ऐसे पॉइंट्स मिले, जहां सीवर और पेयजल पाइपलाइनें एक-दूसरे को क्रॉस कर रही हैं। इनमें इंदौर में 30 हजार से अधिक डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स हैं, जहां सीवर का पानी पेयजल में मिलने का खतरा है।

इस तरह होगा काम

सरकार के द्वारा तय की गई नई नीति के अनुसार अब डेंजर पॉइंट्स और पाइपलाइनों की अंदरूनी स्थिति की जांच रोबोट करेंगे। इसमें ट्रांसलेट तरीके से बिना खुदाई के रोबोट जमीन के अंदर की स्थिति की जांच कर सकेंगे। इस जांच में सीसीटीवी कॉलर सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। रोबोट में हाई-ऱिजॉल्यूशन कैमरा और सेंसर लगे होंगे, जो 300 मीटर लंबे केबल से जुड़े रहेंगे। रोबोट पाइपलाइन के अंदर लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग और डेटा दर्ज करेगा। रोबोट 70 से 900 मिमी व्यास वाली पानी और सीवर पाइपलाइनों में जाकर लीकेज, टूट-फूट और अवैध कनेक्शन का पता लगाएगा।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 21 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें