मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
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गीले कचरे की मात्रा रोजाना 300 टन बढ़ी

उपलब्धि बताई, सवालों से बचे पहले 500 टन रोजाना तो अब 800 टन पर पहुंचा आंकड़ा डोर टू डोर वेस्ट कलेक्शन का इंप्रास्ट्रक्चर नहीं हुआ विकसित 10 साल पुराने इंप्रास्ट्रक्चर पर चल रहा सिस्टम

शहर से निकलने वाली गीले कचरे की मात्रा डेढ़ गुना से अधिक हो गई है जिसके कारण इसके निस्तारण की चिंता बढ़ने लगी है। इंदौर नगर निगम सीमा से 2023-2025 के बीच यह इजाफा तेजी से हुआ है। साल 2022 तक इंदौर शहर से प्रतिदिन 500 से 650 टन प्रतिदिन तक गीला कचरा निकला करता था लेकिन अब यह बढ़कर 750 से 850 के बीच में प्रतिदिन निकल रहा है। बारिश और सर्दियों में इसकी मात्रा 800 से अधिक प्रतिदिन रही है।

शहर में गीले कचरे की मात्रा बढ़ने का मुख्य कारण शहर का विस्तार और नई कॉलोनियों का निर्माण होना है। इसके अलावा बीते सालों में शहर की जनसंख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है। नगर निगम सीमा के 29 गांव में जो जमीन खाली पड़ी थी वहां कालोनियां विकसित हो चुकी है। लोग यहां रहने आ चुके हैं इस कारण से गीले कचरे की मात्रा में बेतहाशा वृद्धि हो चुकी है। मामले में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि इंदौर शहर में पहले 486000 संपत्तिकर के खाता हुआ करते थे अब यह बढ़कर 8 लाख 11000 के करीब पहुंच गए हैं। यही कारण है कि गीले कचरे की मात्रा अचानक बड़ी हुई है इसके निस्तारण के प्रयास किए जा रहे हैं। नगर निगम में गीले कचरे की मात्रा तो ब़ढ़ी है, लेकिन इसके निस्तारण हेतु संसाधनों में वृद्धि और विस्तार नहीं हुआ है, जिसके चलते कई मानकों का पालन नहीं हो रहा है। बीते 10 सालों में नगर निगम ने डोर टू डोर कचरा गाड़ियों की संख्या नहीं बढ़ाई 560 कचरा गाड़ियां अभी साल 2017 से चलाई जा रही है। कचरा गाड़ियों पर गीले कचरे का बोझ बढ़ा है 2 से 3 राउंड में कचरा कलेक्शन हो रहा है। इसके अलावा खुले में कचरा लगातार फेंका जा रहा है जिससे शहर की स्वच्छता पर दाग लग रहा है खाली प्लॉट पर कचरा डंप किया जा रहा है। डोर टू डोर वेस्ट कलेक्शन गाड़ी का समय भी 10 सालों में निश्चित नहीं हो पाया, ना ही कोई ऑनलाइन सिस्टम बना है जिससे लोग यह ट्रैक कर सके कि गाड़ी कब आएगी और उसमें कचरा डाला जा सके। इस मामले में नगर निगम की ऑन डिमांड कचरा कलेक्शन योजना भी असफल साबित हुई है। बिगड़े हुए इस वेस्ट कलेक्शन सिस्टम को सुधारने के सवाल पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव सवाल को टालते नजर आए और बीते 4 सालों की अपनी उपलब्धि गिनाने के दौरान जब सफाई को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इस पूरे सवाल का जवाब देने की बजाय उसे टालना उचित समझा। मामले में साकेत निवासी राजेश मेहता कहते हैं कि फिलहाल इंदौर देश का नंबर वन शहर है और हर साल गार्बेज प्री सिटी का अवार्ड लेता आ रहा है। इसके बावजूद भी कालोनियों में कचरा डंप होता दिखाई दे रहा है, साल 2014 के पहले सड़कों पर कचरा ढेरियां लगी दिखाई देती थी वह दिखाई देने लगी है।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 5 अगस्त 2026 के अंक में पृष्ठ 5 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें