प्रतिनिधि नितिन राठौर)। कहते हैं कि इंसान दुनिया से चला जाता है, लेकिन उसके द्वारा कमाए गए सच्चे दोस्त और उसकी अच्छाइयां हमेशा जिंदा रहती हैं। ऐसा ही एक दिल को झकझोर देने वाला और सच्ची दोस्ती की मिसाल पेश करने वाला नजारा तिरला नगर में देखने को मिला, यहाँ गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर असमय काल के गाल में समाए मिलनसार युवा अरविन्द पाटीदार को उनके मित्रों ने विसर्जन चल समारोह डोल ग्यारस के दौरान एक भव्य और भावुक झांकी के माध्यम से अनूठी श्रद्धांजलि अर्पित की,इस नजारे को जिसने भी देखा, उसकी आंखें छलक आईं और हर राहगीर के मुंह से बस एक ही शब्द निकला ‘दोस्ती हो तो ऐसी' नगर के बेहद हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के धनी अरविन्द पाटीदार का गणेश चतुर्थी के दिन अल्पायु में ही हृदयघात से आकस्मिक निधन हो गया था, त्योहार के दिन इस दुखद खबर से न केवल पाटीदार परिवार बल्कि पूरे नगर में शोक की लहर दौड़ गई थी, अपने चहेते दोस्त के चले जाने के गम से उनके मित्र पूरी तरह टूट चुके थे, अपने दिवंगत मित्र की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए दोस्तों ने इस बार गणेशोत्सव के समापन पर कुछ अलग करने का संकल्प लिया, उन्होंने अरविन्द की याद में एक विशेष श्रद्धांजलि झांकी तैयार की, इस झांकी में अरविन्द के चित्र और उनकी यादों को इस तरह पिरोया गया था कि देखने वालों को लगा जैसे अरविन्द आज भी उनके बीच ही मौजूद हैं,चल समारोह के दौरान जब यह झांकी नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरी, तो दृश्य बेहद भावुक हो गया, झांकी के साथ चल रहे सैकड़ों दोस्तों की आंखें नम थीं और वे अपने मित्र को याद कर रो पड़े, इस दृश्य ने वहां मौजूद हजारों नागरिकों, महिलाओं और बच्चों के दिलों को झकझोर कर रख दिया, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए हजारों लोगों की भीड़ इस अनूठी दोस्ती को देखकर स्तब्ध रह गई, नगरवासियों का कहना है कि आज के दौर में जहां लोग रिश्तों को भूलते जा रहे हैं, वहीं तिरला के इन युवाओं ने यह साबित कर दिया कि सच्ची दोस्ती मौत के बाद भी निभाई जाती है, अरविन्द भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके दोस्तों का यह प्रयास सालों तक मिसाल के रूप में याद रखा जाएगा।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 23 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 8 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




