इंदौर। शहर के ट्रैफिक को सुधारने के लिए जिला प्रशासन, नगर निगम और यातायात पुलिस की संयुक्त मुहिम के बीच मालवा मिल चौराहे पर चार साल पुराना प्रयोग फिर दोहराया गया है। ट्रैफिक को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से यहां दोबारा सिग्नल लगाया गया है। हालांकि सिग्नल शुरू होते ही पाटनीपुरा की ओर से आने वाले वाहनों की लंबी कतार लगने लगी है। कई बार वाहन मालवा मिल नाले के ब्रिज तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि 2022 में जिस व्यवस्था के कारण जाम की स्थिति बनी थी, वही प्रयोग इस बार कितना कारगर होगा।
मालवा मिल शहर के सबसे व्यस्त चौराहों में शामिल है। यहां पांच रास्ते आकर मिलते हैं, जिससे अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों का दबाव एक साथ बढ़ता है। खासकर पाटनीपुरा से आने वाले वाहन सिग्नल की टाइमिंग के कारण लंबे समय तक ग्रीन सिग्नल का इंतजार करते हैं। फिलहाल त्योहारों का सीजन शुरू नहीं हुआ है, ऐसे में आने वाले दिनों में दशहरा-दीपावली के दौरान स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
2022 में हटाना पड़ा था सिग्नल
पूर्व निगम आयुक्त प्रतिभा पाल के कार्यकाल में 2022 में भी यहां सिग्नल लगाया गया था। तब सिग्नल के कारण वाहनों की कतार बढ़ने और जाम लगने की समस्या सामने आई थी। त्योहारों के दौरान स्थिति बिगड़ने के बाद तत्कालीन विधायक आकाश विजयवर्गीय की पहल पर सिग्नल हटाया गया था। अब यातायात सुधार अभियान के तहत पुलिस ने इसे फिर लगाने का निर्णय लिया है।
दिनभर में 1.5 से 2 लाख वाहन
मालवा मिल से दिनभर में करीब 1.5 से 2 लाख दोपहिया वाहन गुजरने का अनुमान।
चौराहे पर पांच प्रमुख रास्तों का ट्रैफिक एक साथ मिलता है।
मार्ग विजयनगर-बायपास क्षेत्र को शहर के मध्य और राजवाड़ा से जोड़ता है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव मालवा मिल से भमोरी तक फ्लाईओवर का प्रस्ताव दे चुके हैं। ट्रैफिक विशेषज्ञ अतुल सेठ का कहना है कि बीआरटीएस के बजाय भमोरी से मालवा मिल तक दो लेन का फ्लाईओवर बनाया जाए तो इस कॉरिडोर पर जाम की समस्या काफी हद तक कम की जा सकती है। फिलहाल सिग्नल का नया प्रयोग कितना सफल रहता है, इसका फैसला आने वाले दिनों में ट्रैफिक की वास्तविक स्थिति करेगी।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 18 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 10 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




