प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोद द्विवेदी ने बताया कि पंजीयन क्षैत्र में अब किसी भी जिले में पंजीयन करवाया जा सकेगा संपत्ति के दस्तावेज का मतलब जिले एवं क्षैत्र का बंधन समाप्त। इंदौर में गजट नोटिफिकेशन जारी करके चार उपपंजीयक कार्यालय बनाए गए और क्षैत्र का बंटवारा किया गया और उसके अलग-अलग जिला पंजीयक रखें गये तो नोटिफिकेशन समाप्त नहीं जाना चाहिए और एक ही उपपंजीयक कार्यालय हो एक दो तीन चार उपकेंद्र। जिला मूल्याकंन समिति समाप्त की जानी चाहिए क्योंकि गाईड लाईन बनाकर हर जिले को लक्ष्य दिया जाता है जब किसी भी जिले में रजिस्ट्री हो सकती है तो आय किस जिले में जुड़ेंगी और दस्तावेज किस जिले का माना जायेगा। उपपंजीयक दस्तावेज किसी क्या यह गजट किया कारण से वापस करता है तो कौन से जिला पंजीयक कार्यालय में जिला पंजीयक सुनवाई करेंगे यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। स्टाम्प शुल्क विवाद पर किस जिला पंजीयक पास प्रकरण दर्ज किया जायेगा यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। आपत्ति एवं न्यायालय स्थगन आदेश क्या पूरे प्रदेश में लगाना पड़ेगा और अगर ऐसी आपत्ति बाद भी रजिस्ट्री हो गई तो दोषी कौन विभाग स्वयं को मानेगा न्यायालय अवमानना किस पर लगेगी। रजिस्ट्री आय किस जिले में गिनी जावेगी,, जहां रजिस्ट्री का स्लाट बुक किया गया या जहां पंजीयन हुआ। सभी उपपंजीयक क्या वरिष्ठ उपपंजीयक बना दिए गए या वरिष्ठ उपपंजीयक पद समाप्त किया जावेगा।
धारा 31का विधान समाप्त होगा
एडवोकेट प्रमोद व्दिवेदी ने सवाल उठाया कि जब तक सरकार इस पर भी विचार नहीं करेंगी आम आदमी छला जायेगा। सरकार को उपपंजीयक कार्यालय में उपपंजीयक पद भरे जाने चाहिए। मप्र में आज भी कुछेक जिलों में उपपंजीयक नहीं है तो कुछेक स्थानों पर सप्ताह में दो दिन उपपंजीयक कार्यालय खुलता है। मंदसौर, देवास आदि जिले उदाहरण है। मप्र में एवजी से विभाग चल रहा है, सरकार इसके लिए क्या करने जा रही यह भी स्पष्ट करें।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 13 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




