सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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संपादकीय मंत्री का थप्पड़ और लोकतंत्र की मर्यादा पर सवाल, क्या असहमति का जवाब हिंसा हो सकता है? दि

ल्ली के लोक निर्माण विभाग के मंत्री प्रवेश वर्मा द्वारा हाल में तिलक नगर इलाके में सड़क निरीक्षण के दौरान एक व्यक्ति को थप्पड़ मारने की घटना ने कई गंभीर…

ल्ली के लोक निर्माण विभाग के मंत्री प्रवेश वर्मा द्वारा हाल में तिलक नगर इलाके में सड़क निरीक्षण के दौरान एक व्यक्ति को थप्पड़ मारने की घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या किसी मंत्री से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद की जा सकती है? लोकतंत्र में एक अच्छे जनप्रतिनिधि की पहचान उसके स्वभाव, कार्यशैली और जनता के प्रति जवाबदेही से होती है। आदर्श नेता वही होता है, जिसके कार्यों एवं निर्णयों में निष्पक्षता, पारदर्शिता और स्पष्टता हो। वह पूरी ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करे और उसमें अपनी आलोचना सुनने का साहस हो। मगर जब सरकार में मंत्रिपद पर आसीन कोई जनप्रतिनिधि सार्वजनिक स्थल पर आपा खो दे और जनता से दुर्व्यवहार करने लगे, तो उसे किस तरह देखा जाएगा। दिल्ली के लोक निर्माण विभाग के मंत्री प्रवेश वर्मा द्वारा हाल में तिलक नगर इलाके में सड़क निरीक्षण के दौरान एक व्यक्ति को थप्पड़ मारने की घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या किसी मंत्री से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद की जा सकती है? यह घटना उस धारणा के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें उच्च पद पर बैठे जनप्रतिनिधि के व्यवहार को समाज में मिसाल के तौर पर देखा जाता है। असहमति, आलोचना या विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। ऐसी स्थिति में संयम और पद की गरिमा का खयाल रखा जाना बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि बीते रविवार को आप विधायक जरनैल सिंह ने मंत्री प्रवेश वर्मा की मौजूदगी में सड़क की सतह का कुछ हिस्सा उखाड़कर मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाया था। आरोप है कि इस दौरान मंत्री ने घटना का वीडियो बना रहे एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया। उनका दावा है कि संबंधित व्यक्ति ने उनके परिवार के बारे में अपशब्द कहे। इस घटना से जुड़े आरोप-प्रत्यारोप जांच का विषय है, लेकिन सवाल है कि क्या मंत्री की हिंसक प्रतिक्रिया को उचित ठहराया जा सकता है? अगर उनके साथ कोई दुर्व्यवहार हुआ, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती थी। सड़क की गुणवत्ता हो या किसी अन्य सार्वजनिक समस्या का सवाल, उसका समाधान उग्र व्यवहार से नहीं, बल्कि तर्क, जांच और कानून के दायरे में ही हो सकता है। सार्वजनिक जीवन में पद से अधिक महत्त्वपूर्ण उसकी गरिमा और मर्यादा होती है। जिन जनप्रतिनिधियों से हर स्तर पर जिम्मेदारी और जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है, अगर वही कानून का सम्मान नहीं करेंगे, तो आम नागरिक से क्या उम्मीद की जा सकती है।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 30 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें