सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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संपादकीय तीन साल बाद भी नहीं थमी मणिपुर हिंसा, कब निकलेगा संकट का समाधान?

ज भी अलग-अलग जातीय समुदाय कई जगहों पर एक दूसरे के खिलाफ खड़े हैं और आए दिन निर्दोष लोगों की जान जा रही है। करीब तीन साल से ज्यादा गुजर…

ज भी अलग-अलग जातीय समुदाय कई जगहों पर एक दूसरे के खिलाफ खड़े हैं और आए दिन निर्दोष लोगों की जान जा रही है। करीब तीन साल से ज्यादा गुजर जाने के बावजूद आज भी मणिपुर में जो हालात हैं, उससे यही लगता है कि या तो सरकार को समस्या के समाधान का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है या फिर स्थिति की जटिलता को लेकर शासन-प्रशासन उदासीन है। वरना इतने वक्त में सभी पक्षों को संवाद की मेज पर लाकर कोई सर्वमान्य हल निकालने के बजाय आखिर ऐसा क्यों है कि संकट का स्तर ज्यों का त्यों बना हुआ है। आज भी अलग- अलग जातीय समुदाय कई जगहों पर एक दूसरे के खिलाफ खड़े हैं और आए दिन निर्दोष लोगों की जान जा रही है। स्थिति का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि सरकार को एक बार फिर से कुछ इलाकों को छोड़ कर मणिपुर को अशांत क्षेत्र घोषित करने की जरूरत पड़ गई। जाहिर है, राज्य में हिंसा पर काबू पाने में शुरुआती लापरवाही का सिरा अब भी कायम है और सरकार एक तरह से लाचार दिख रही है। क्या यह राज्य में कानून-व्यवस्था को संभाल पाने में सरकार की नाकामी का सबूत नहीं है? गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नगालैंड के कुछ जिलों के साथ-साथ मणिपुर में तेरह थाना क्षेत्रों को छोड़ कर समूचे राज्य को फिर से अशांत क्षेत्र घोषित कर दिया है। अब इन इलाकों में एक अक्तूबर के बाद अगले छह महीनों तक यह नियम लागू रहेगा। दूसरी ओर, मणिपुर के कामजोंग जिले में तांगखुल नगा समुदाय के चार लोगों के गोलियों से छलनी शव मिले। दरअसल, मणिपुर में हिंसा के एक जटिल दुश्चक्र में पहुंच जाने की वजह सरकार की वह अनदेखी है, जो सामान्य दिनों में की गई। मैतेई समुदाय को जनजातीय दर्जा देने के सवाल पर उपजे विवाद ने कुकी-जो समुदाय के साथ टकराव का रूप ले लिया और मई 2023 में हिंसा की शुरुआत हुई। उससे पहले ही अगर सरकार ने जरूरी सजगता दिखाई होती, तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते। आज भी न केवल कुकी-जो और मैतेई समुदायों के बीच हिंसक टकराव जारी है, बल्कि उस हिंसा का विस्तार अन्य समुदायों तक भी हो गया है। सवाल है कि अक्सर सब कुछ ठीक हो जाने का दावा करती केंद्र और राज्य सरकार के भीतर इस समस्या को खत्म करने और टकराव के मोर्चे पर खड़े अलग-अलग पक्षों के बीच संवाद कायम कर एक हल तक पहुंचने की इच्छाशक्ति क्यों नहीं दिखती! महाराष्ट्र की समान नागरिक सहिंता समिति की दूसरी बैठक के दो दिन बाद बॉम्बे हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आरसी चव्हाण ने पैनल से इस्तीफा दे दिया है।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 28 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें