बीते जुलाई में ट्रंप प्रशासन ने जिस नियम को अंतिम रूप दिया था, उसमें छात्र और ‘एक्सचेंज विजिटर वीजा’ के लिए चार साल की समय-सीमा तय की गई थी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक और मनमाने फैसले पर संघीय अदालत ने फिलहाल रोक लगा दी है। यह अदालती आदेश नियमों के लागू होने से ठीक एक दिन पहले आया है। ट्रंप प्रशासन विदेशी छात्रों, शोधार्थियों और पत्रकारों के अमेरिका में रहने की अवधि सीमित करना चाहता था। मगर अदालत ने सरकार के तर्कों को बेहद कमजोर बताकर खारिज कर दिया। यह फैसला भारतीय संदर्भ में भी खास है, क्योंकि इससे साढ़े तीन लाख से अधिक उन भारतीय विद्यार्थियों को राहत मिलेगी, जो अमेरिका में अध्ययन कर रहे हैं। सवाल यह है कि एक तरफ अमेरिका दुनिया की प्रतिभाओं को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहता है और दूसरी ओर छात्र वीजा को लेकर कड़े प्रावधान लागू करने में जुटा है! इन प्रयासों में इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता कि अमेरिका में जो विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, उनके भविष्य का क्या होगा। इससे पहले अमेरिका ने भारत समेत कई देशों पर भारी- भरकम शुल्क लगाया था, जिस पर बाद में वहां की सर्वोच्च अदालत ने रोक लगा दी थी। बीते जुलाई में ट्रंप प्रशासन ने जिस नियम को अंतिम रूप दिया था, उसमें छात्र और ‘एक्सचेंज विजिटर वीजा’ के लिए चार साल की समय-सीमा तय की गई थी। ‘एक्सचेंज विजिटर वीजा’ अमेरिका का एक प्रकार का गैर-आप्रवासी वीजा है, जो ऐसे लोगों को दिया जाता है, जो शैक्षणिक, सांस्कृतिक या पेशेवर कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका जाते हैं। सवाल यह नहीं कि वीजा व्यवस्था में दुरुपयोग रोकने के उपाय होने चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि क्या हर समस्या का समाधान दरवाजे संकरे करना ही है। जिस देश ने दुनिया भर की प्रतिभा को अपने विश्वविद्यालयों और प्रयोगशालाओं से जोड़ा, वही यदि प्रशासनिक अनिश्चितता पैदा करेगा, तो उसका नुकसान केवल विदेशी छात्रों को ही नहीं, बल्कि अमेरिकी शिक्षा, शोध और अर्थव्यवस्था को भी होगा। अदालत ने भी चेताया है कि नए नियमों से व्यवस्था को नुकसान हो सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरी है, लेकिन वह सार्वभौमिक बहाना नहीं हो सकती, जिसके सहारे सरकार हर कठोर कदम को उचित ठहरा दे।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 17 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 8 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




