शहर के शिवाजी मार्केट में मेट्रो प्रोजेक्ट और कान्ह नदी रिवरप्रंट योजना के तहत चल रही निर्माण गतिविधियों ने व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दुकानों के ठीक सामने करीब चार फीट ऊंची दीवारें खड़ी किए जाने से ग्राहकों का दुकानों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन और मेट्रो निर्माण कंपनियां उनकी परेशानी की अनदेखी करते हुए मनमाने तरीके से काम कर रही हैं, जिससे वर्षों पुराना कारोबार प्रभावित हो रहा है।
व्यापारी दिनेश राठोर के मुताबिक मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़ी गतिविधियों के कारण दुकानों के सामने रास्ता बाधित हो गया है। दीवारें बनने के बाद ग्राहकों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है और कई दुकानों पर व्यापार ठप पड़ने की स्थिति है। व्यापारियों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान वैकल्पिक रास्ते और कारोबार प्रभावित होने की स्थिति का कोई समुचित इंतजाम नहीं किया गया। इधर, कान्ह नदी के सौंदर्यीकरण और मेट्रो विस्तार के नाम पर शिवाजी मार्केट की करीब 120 से 126 पुरानी दुकानों को हटाने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन की ओर से प्रभावित व्यापारियों को नंदलालपुरा कॉम्प्लेक्स की ऊपरी मंजिलों पर शिफ्ट करने की योजना बताई जा रही है। हालांकि व्यापारी इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से सड़क और बाजार स्तर पर चल रही दुकानों को ऊपरी मंजिल पर ले जाने से ग्राहक वहां नहीं पहुंचेंगे और उनका कारोबार पूरी तरह चौपट हो जाएगा। व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उन्हें बिना उचित समझौते, पुनर्वास और पारदर्शी प्रक्रिया के जबरन विस्थापित न किया जाए। उनका कहना है कि यदि दुकानों को हटाना आवश्यक है तो शहर में ही बाजार की अनुकूल जगह पर ग्राउंड फ्लोर में उचित वैकल्पिक दुकानें उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उनकी रोजी-रोटी सुरक्षित रह सके। व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण और विस्थापन की कार्रवाई पर पुनर्विचार कर प्रभावित दुकानदारों से संवाद किया जाए और ऐसा समाधान निकाला जाए, जिसमें विकास के साथ उनका रोजगार भी सुरक्षित रहे। वही इस मामले में नगर निगम द्वारा विस्थापन की प्रक्रिया की जा रही है लेकिन नगर निगम ने जिन किराएदारों को दुकान किराए पर दी थी उन्होंने दुकान अन्य लोगों को बेच दी है और असली मालिक सामने नहीं आ रहे हैं ऐसी स्थिति में नगर निगम उन लोगों को दुकानें आवंटित नहीं करना चाहता जिनके पास वैधानिक अधिकार नहीं है इसी उलझन के चलते मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 24 अगस्त 2026 के अंक में पृष्ठ 8 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




