इस साल का मानसून का सत्र आज समाप्त हो रहा है। इस साल इंदौर में कब बारिश होने के कारण सूखा पड़ने जैसी स्थिति बन गई है। अभी तक शासन प्रशासन के द्वारा इंदौर को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित नहीं किया गया है। मौसम विभाग के द्वारा 1 जून से लेकर 30 सितंबर तक की अवधि को मानसून की अवधि माना जाता है। इस हिसाब से आज मानसून का अंतिम दिन है। आज मानसून की विदाई हो जाएगी। आज के लिए मौसम विभाग के द्वारा यह भविष्यवाणी की गई है कि आज इंदौर में तेज और कड़क धूप बनी रहेगी। पिछले कुछ दिनों से लगातार इंदौर में तेज धूप आ रही है। जिसके चलते हुए नागरिकों को जोरदार गर्मी का एहसास हो रहा है। आज मानसून की विदाई की बेला आ गई है लेकिन इंदौर में इस साल आवश्यकता की तुलना में बहुत ही कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार इंदौर को औसत रूप से 40 इंच बारिश की जरूरत रहती है। इस साल इंदौर में अभी तक साढ़े 23 इंच बारिश ही हुई है। इस तरह से इंदौर में 13 इंच बारिश कम हुई है। इंदौर का एक भी तालाब पानी से लबालब नहीं भर सका है। इंदौर के पुराने और चर्चित यशवंत सागर तालाब में एक बार भी ऐसी स्थिति नहीं बनी जब उसके गेट खोलकर पानी छोड़ना पड़ा हो। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति यह बताती है कि इंदौर में इस साल सूखा वाले हालात बन गए हैं।
शहर में सूखे की स्थिति बन जाने के बावजूद अभी तक शासन और प्रशासन के द्वारा इंदौर को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करते हुए यहां पर राहत कार्य के लिए कार्य योजना बनाने का काम भी शुरू नहीं किया गया है। सबसे ज्यादा चिंता तो इस बात की है कि इस साल इंदौर में पानी को लेकर बड़े संकट की स्थिति बन सकती है। जिन क्षेत्रों में नर्मदा पेयजल योजना के अंतर्गत पानी पहुंचता है उन क्षेत्रों में तो कहीं कोई दिक्कत नहीं है लेकिन जो क्षेत्र पूरी तरह से बोरिंग पर निभर उन क्षेत्रों में हालत बिगड़ जाने की आशंका है। इस साल बारिश कम होने के कारण जमीन के अंदर भी पानी पहुंचाने का काम नहीं हो सका है। नगर निगम के द्वारा वाटर डिस्चार्ज के लिए निजी संस्थानों में भी व्यवस्था करने के लिए दबाव बनाया गया था। जिन संस्थाओं के द्वारा बारिश के पानी को जमीन के अंदर भेजने के लिए वाटर रिचार्जिंग के पाइंट लगाए गए वहां भी कोई मतलब नहीं निकल सका है। जब बारिश ही पर्याप्त नहीं हुई तो जमीन के अंदर पानी पर्याप्त कैसे जा सकता है। इस स्थिति में जिन क्षेत्रों में नागरिक अपनी अपनी की आवश्यकता बोरिंग के माध्यम से पूरी करते हैं उन क्षेत्रों में नागरिकों को इस साल गंभीर पानी के संकट का सामना करना पड़ सकता है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 30 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




