कल शाम को चिमन बाग चौराहे के पास में बारिश के समय पर एक बड़ा पेड़ गिर जाने से डिप्टी कलेक्टर की मां की मौत हो गई और परिवार के सदस्य घायल हो गए। इस घटना में प्रशासन के स्तर पर असंवेदनशीलता उजागर होकर सामने आई है। इतनी बड़ी घटना डिप्टी कलेक्टर के परिवार के साथ होने के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। जब भी ऐसी कोई घटना होती है जिसमें की जन हानि हो जाती है तो तत्काल नगर निगम, पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं। पीड़ित परिवार की मदद करने की जल्दी से जल्दी कोशिश की जाती है। कल जब बारिश के मौसम के दौरान डिप्टी कलेक्टर पूर्णिमा सिंगी का परिवार हादसे का शिकार हुआ तो स्थिति बदल गई। जिस कार पर पेड़ गिरा उस कार में डिप्टी कलेक्टर की मां और परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे। इस घटना में डिप्टी कलेक्टर की मां की मौत हो गई और परिवार के सदस्य घायल हो गए। कार पर पेड़ गिरा हुआ पड़ा था और अंदर लोग फंसे हुए थे। इस घटना को नगर निगम के द्वारा भी गंभीरता से नहीं लिया गया। घटना के काफी देर बाद पेड़ काटकर हटाया गया और फिर कार में से लोगों को निकालने का काम हो सका। क्षेत्र के लोगों ने जरूर कार के दरवाजे के
इंदौर। रावजी बाजार और द्वारकापुरी थाना क्षेत्रों में मामूली विवाद और रंजिश के चलते कांच फोड़कर उसमें सवार लोगों को बाहर निकालने का काम किया। यह इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी जिला प्रशासन की ओर से एक भी अधिकारी मौके पर नहीं आया। पुलिस का थाने का स्टाफ जरूर मौके पर आया था लेकिन बड़े अधिकारियों ने मौके पर आना उचित नहीं समझा। इस तरह की घटना होने पर हमेशा प्रशासन की ओर से प्रोटोकॉल का काम संभालने वाले एडीएम मौके पर पहुंच जाते हैं। इस बार तो प्रशासन की ओर से एडीएम भी मौके पर नहीं पहुंचे। यह घटना एक डिप्टी कलेक्टर के साथ होने के बाद भी यह स्थिति रही तो ऐसे में यह समझा जा सकता है कि यदि आम आदमी के साथ ऐसी घटना होती तो फिर क्या स्थिति रहती।
पीड़ित की रिपोर्ट पर तीनों आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 8 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




