नगर निगम के द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बनाए गए 19 सामुदायिक शौचालय ठेके पर दिए जाएंगे। इसमें जो एजेंसी इन शौचालय को ठेके पर लेगी वही इनका संचालन और संधारण का कार्य करेगी।
नगर निगम के द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के तहत नागरिकों को मूत्रालय और शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शहर में विभिन्न स्थानों पर निर्माण किए गए हैं। इसमें ऐसे क्षेत्र जहां पर की लोगों के घरों में पक्के शौचालय नहीं है तो वहां पर निगम के द्वारा सामुदायिक शौचालय का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही शहर में भ्रमण करने वाले लोगों को आपात स्थिति में इन शौचालय का उपयोग करने की सुविधा भी दी गई है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत निगम के द्वारा बनाए गए 19 सामुदायिक शौचालय इस समय खराब स्थिति की तरफ बढ़ रहे हैं। पूरे देश में इंदौर एक हिस्सा शहर है जहां पर की सड़क पर चलने वाले व्यक्ति को भी स्पष्ट रूप से स्वच्छ शौचालय और मूत्रालय नजर आते हैं और वह उनका उपयोग कर सकता है। इस स्थिति को देखते हुए अब नगर निगम के द्वारा इन सभी 19 सामुदायिक शौचालय को संचालन और संधारण के लिए ठेके पर देने का फैसला लिया गया है। निगम के अधिकारियों ने बताया कि इन्हें विभिन्न संस्थाओं को ठेके पर दिया जाएगा। इसके लिए इन संस्थाओं के आवेदन बुलवाए गए हैं। जो संस्था इस कार्य को करने में इच्छुक है वह अपने आवेदन दे सकते हैं। इन संस्थाओं को इस कार्य को करने के एवज में नगर निगम के द्वारा प्रति माह की निश्चित राशि दी जाएगी।
नहीं लेते हैं सेवा शुल्क
शहर में नगर निगम के द्वारा दो तरह के सार्वजनिक शौचालय का संचालन किया जाता है। इसमें से शौचालय का संचालन सुलभ इंटरनेशनल के द्वारा किया जाता है वहां पर उपयोग करने वाले व्यक्ति को उपयोग शुल्क चुकाना पड़ता है। सामुदायिक शौचालय का संचालन नगर निगम के द्वारा विभिन्न संगठन के माध्यम से कराया जाता है उसमें उपयोग करने वाले व्यक्ति से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।
संचालन होता है चुनौती
निगम के लिए सामुदायिक शौचालय का संचालन करना एक बड़ी चुनौती रहता है। नगर निगम अपने स्रोत से इस कार्य को नहीं कर पाता है। यही कारण है कि सारे शहर में इस तरह के शौचालय संचालन के लिए दूसरे संगठनों को ठेके पर दिए गए हैं। इस तरह की ठेका पद्धति के कारण इनका संचालन व्यवस्थित और बेहतर तरीके से हो जाता है। इनमें साफ सफाई की हालत भी गुणवत्तापूर्ण बनी रहती है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 25 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




