निगम की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए अब दुकानों पर लगे विज्ञापन बोर्डों से ज्यादा राजस्व जुटाने की तैयारी है। अभी विज्ञापन बोर्ड शुल्क से निगम को सालाना करीब 1 से 2 करोड़ रुपए ही मिल रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में दुकानें और विज्ञापन बोर्ड निगम के रिकॉर्ड से बाहर हैं। ऐसे में शहर की दो लाख से अधिक दुकानों का सर्वे कर सभी विज्ञापन बोर्डों का डेटा तैयार किया जाएगा। इसके बाद नियमों के तहत शुल्क वसूली होने से निगम की आय बढ़ने की उम्मीद
मार्केट विभाग ने सर्वे और शुल्क वसूली के लिए ठेकेदार एजेंसी नियुक्त करने हेतु टेंडर जारी किए हैं। एजेंसी मुख्य मार्गों से लेकर गली-मोहल्लों, कॉलोनियों और बाजारों तक दुकानों का सर्वे करेगी। खासतौर पर 3 फीट से ऊंचे विज्ञापन बोर्ड चिह्नित किए जाएंगे। सर्वे के बाद निगम के पास दुकानों और विज्ञापन बोर्डों का अपडेट रिकॉर्ड भी तैयार हो जाएगा। दुकान के नाम वाले बोर्ड पर शुल्क नहीं लगेगा, लेकिन दुकान के बोर्ड पर किसी अन्य कंपनी के उत्पाद का प्रचार-प्रसार, लोगो या ब्रांडिंग होने पर नियमानुसार शुल्क देना होगा। कई दुकानदार बिना अनुमति ऐसे बोर्ड लगा रहे हैं। इन पर मप्र आउटडोर विज्ञापन मीडिया नियम-2017 के तहत कार्रवाई की जाती है। – आय बढ़ेगी: अभी 1-2 करोड़ रुपए की सालाना वसूली, नए सर्वे से राजस्व बढ़ाने का लक्ष्य।
– छूटे बोर्ड पकड़ में आएंगे: रिकॉर्ड से बाहर दुकानों और विज्ञापन बोर्डों की पहचान
– दो लाख दुकानों का डेटा: पूरे शहर का नया रिकॉर्ड
– ब्रांडिंग पर शुल्क: दूसरी कंपनी के उत्पाद के प्रचार वाले
– निगम की निगरानी: एजेंसी सर्वे करेगी, लेकिन प्रक्रिया पर निगरानी निगम होगी।
तैयार होगा।
बोर्ड पर शुल्क लगेगा।
अधिकारियों की रहेगी।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 28 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 10 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




