शहर कांग्रेस के अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा है कि इंदौर नगर निगम को अपने दम पर ही आने वाले समय में पैदा होने वाले पानी के संकट से निपटने की तैयारी करना चाहिए। निगम के द्वारा शासन से जो 80 करोड रुपए की मदद मांगी गई है वह मिलने की उम्मीद बहुत कम है।
चौकसे ने कहा कि जब इंदौर नगर निगम की नई बिल्डिंग में निगम परिषद के बैठक कक्ष का लोकार्पण समारोह था तो उसमें भाग लेने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आए थे। उस समय पर मुख्यमंत्री के द्वारा इंदौर नगर निगम को 50 करोड रुपए का अनुदान देने की घोषणा की गई थी। इस घोषणा के बाद अब तक इंदौर नगर निगम को यह राशि नहीं मिल सकी है। इसके साथ ही नगर निगम को हर माह चुंगी क्षतिपूर्ति के रूप में राज्य सरकार से 45 करोड रुपए मिलना चाहिए। इसमें से भी सरकार कभी 20 करोड़ तो कभी 25 करोड़ ही देती है। नगर निगम को सरकार से प्रवेश कर, स्टॉम्प ड्यूटी आदि के भी करोड़ों रुपए लेना है। इसमें से कोई भी पैसा देने में सरकार रुचि नहीं ले रही है। चौकसे ने कहा कि जब मुख्यमंत्री के द्वारा की गई घोषणा की राशि भी नगर निगम को नहीं मिल सकी है तो ऐसे में यह उम्मीद नहीं की जा सकती है कि पानी के संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार की ओर से नगर निगम को कोई अलग से विशेष अनुदान मिल जाएगा। ऐसे में नगर निगम को पानी के संकट की स्थिति से निपटने के लिए अपने स्तर पर ही तैयारी करना होगी। नगर निगम के द्वारा अभी जिस तरह से केवल मीटिंग का आयोजन किया जा रहा है उससे जल संकट से निपटने का काम नहीं हो सकेगा। पानी की कमी की पूर्ति निगम कैसे करेगा उसके लिए ठोस योजना बनाना होगी। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने अपना बयान जारी करते हुए कहा कि इंदौर में आने वाले दिनों में जलसंकट की आशंका को देखते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बैठक बुलाई, लेकिन भाजपा के ज्यादातर विधायक बैठक से नदारद रहे। इससे साफ है कि भाजपा के भीतर आपसी तालमेल की कमी है। जब शहर के सामने पानी जैसा गंभीर मुद्दा खड़ा है, तब जनप्रतिनिधियों का बैठक में नहीं पहुंचना जनता के प्रति उनकी गंभीरता पर सवाल खड़े करता है। कैलाश विजयवर्गीय कह रहे हैं कि जिनके क्षेत्रों में पानी की समस्या नहीं है, वे बैठक में नहीं आए। सवाल यह है कि क्या जलसंकट केवल किसी एक विधानसभा क्षेत्र का मुद्दा है, यह इंदौर पूरे शहर का है और पानी की समस्या किसी भी क्षेत्र में पैदा हो सकती है। सरकार को अभी से ठोस तैयारी करनी चाहिए, न कि संकट आने का इंतजार करना चाहिए। भाजपा को पहले अपने नेताओं के बीच तालमेल बनाना चाहिए और फिर जनता को जलसंकट से निपटने का भरोसा देना चाहिए। इंदौर की जनता को आपसी राजनीतिक खींचतान नहीं, पानी का स्थायी समाधान चाहिए।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 16 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 3 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें





