इस साल शहर में कम बारिश होने के कारण पानी का गंभीर संकट पैदा होने की आशंका बन गई है। शहर के जिन क्षेत्रों में नर्मदा की लाइन नहीं है और लोग पूरी तरह से बोरिंग के पानी पर निर्भर है वहां लोगों की पानी की आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए आखिर पानी लाएंगे कहां से? यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है लेकिन इस सवाल का कोई जवाब इंदौर नगर निगम के अधिकारियों के पास नहीं है। समीक्षा के नाम पर जनता को जागरूक करने का ही हल्ला मचाया जा रहा है।
इस साल इंदौर में औसत से कम बारिश होने के कारण हालत गंभीर होते हुए नजर आ रहे हैं। इन हालात में यह माना जा रहा है कि जनवरी के महीने से इंदौर में पानी का संकट पैदा हो जाएगा। इस संकट से निपटने का काम किस तरह से करना है इसकी कोई योजना नहीं बन पा रही है। यह तो निश्चित है कि शहर के जिन 20% क्षेत्र में नर्मदा की पानी की लाइन नहीं है वहां पर लोग पूरी तरह से बोरिंग पर निर्भर है। जब इन लोगों के बोरिंग बंद हो जाएंगे तो फिर इन लोगों को पानी की आवश्यकता पड़ेगी। नगर निगम कहना है कि हम टैंकर के माध्यम से पानी भेजेंगे। पिछले साल भी गर्मी में इंदौर में करीब 6000 बोरिंग बंद हो गए थे। नगर निगम के द्वारा इन बोरिंग वाले क्षेत्र में टैंकर के माध्यम से पानी भेजने की पहल की गई थी। इस पहल का परिणाम यह हुआ था कि नगर निगम पानी की टंकी से टैंकर भरा रहा था और समस्या वाले क्षेत्र में भेज रहा था। ऐसे में टंकी से सप्लाई वाले क्षेत्र में भी नागरिक पानी की कमी से परेशान हो रहे थे और जहां बोरिंग बंद हो गए वहां भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा था।
पिछले साल तो बारिश अच्छी हुई थी उसके बाद भी बड़ी संख्या में बोरिंग बंद हो गए थे। इस साल तो बारिश ही बहुत कम हुई है। शहर को 40 इंच बारिश की जरूरत होती है जबकि केवल 23 इंच बारिश हो सकी है। ऐसे में इस बार पानी के संकट की समस्या गंभीर रूप लेने वाली है। इस समस्या के समाधान का कोई रास्ता अभी तक नगर निगम नहीं खोज पाया है।
निगम के अधिकारी दावा करते हैं कि टैंकर के माध्यम से समस्या वाले क्षेत्रों में पानी भेजा जाएगा और अधिक संख्या में टैंकर सड़क पर दौड़ाए जाएंगे। टैंकर के माध्यम से पानी भेजना तक तो बात ठीक है लेकिन प्रश्न यही है कि टैंकर में भरने के लिए भी पानी कहां से लाएंगे। इस सवाल का कोई जवाब अभी निगम के अधिकारी नहीं ढूंढ पाए हैं।
बोरिंग पर सबसे ज्यादा संकट
इस बार पानी के संकट में सबसे बड़ी समस्या बोरिंग को लेकर पैदा होने वाली है। पानी कम गिरने से जमीन के अंदर भी पानी कम जा पाया है। ऐसे में बोरिंग कोई बहुत ज्यादा साथ नहीं दे पाएंगे। इसी स्थिति के कारण पानी का सबसे बड़ा संकट पैदा होने की आशंका बनी हुई है। नगर निगम के द्वारा इस आशंका से निपटने के लिए हकीकत वाली कोई तैयारी नहीं की जा रही है। निगम बार-बार इसी बात पर जोर दे रहा है कि जन जागरण करते हुए लोगों को पानी की राशनिंग करने के लिए प्रेरित करेंगे। इस तरह के अभियान से कितना पानी बचा लिया जाएगा यह सबसे बड़ा प्रश्न है।
दो बार भरना पड़ेगा तालाब
इस बार तो यशवंत सागर तालाब पर भी संकट के बादल हैं। इस तालाब में 19 फीट पानी आता है। अभी तालाब में 17 फीट पानी ही है। ऐसे में इस तालाब से नवंबर या दिसंबर तक ही जल सप्लाई हो सकेगा। इस तालाब से रोज 30 एमएलडी पानी लिया जाता है। यह पानी 6 टंकी के माध्यम से नागरिकों को वितरित किया जाता है। ऐसा माना जा रहा है कि इस बार गर्मी के समय तक इस तालाब को नर्मदा क्षिप्रा लिंक योजना या नर्मदा गंभीर लिंक योजना के पानी से दो बार भरना पड़ेगा। जब जाकर इस तालाब से चैनल को मिलने वाला पानी निरंतर रह पाएगा। अभी तो लिंक योजना से इस तालाब को भरने के प्रस्ताव को भी सरकार की मंजूरी नहीं मिल पाई है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 16 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 3 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें





