प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोद द्विवेदी लगातार नामांकन घोटाले का मुद्दा उठा रहे हैं। अब निगम ने नामांतरण के लिए अलग- अलग व्यवस्था शुरू कर दी है। द्विवेदी ने कहा कि निगम अभी भी ध्यान दें कि कालोनाईजर द्वारा वैध कालोनी की रजिस्ट्री की गई है तो उसके सम्पूर्ण दस्तावेज एक बार प्राप्त करके फाईल बना ली जाए। उससे रजिस्ट्री की लिस्ट लेकर उसके साथ सहमति पत्र ले लिया जाए या नामांतरण आवेदन साथ सहमति पत्र का कालम, पृष्ठ जोड़ दिया जाए। वहीं जो नामांतरण के लिए लोग आते हैं उनसे जाहिर सूचना के पैसे झोन पर ही ले लिए जाते हैं। किसी से 1 हजार तो किसी से 1500 रु. लेकर नाम मात्र के छपने वाले अखबारों में 100 और 200 रु. में यह जाहिर सूचना झोन पर बैठने वाले राजस्व से संबंधित लोग दे देते हैं, ऐसा खेल ज्यादातर झोन पर चल रहा है और रोजाना हजारों- हजार रुपये झोन पर बैठने वाले नामांतरण करने वाले कमा रहे हैं। यह कर्मचारी लगातार अखबारों से भाव कर कम से कम में जाहिर सूचना लगा देते हैं और नामांतरण कराने वालों से ज्यादा से ज्यादा रुपये लेते हैं। यह कार्य क्या अधिकारियों नहीं दिख रहा है। द्विवेदी ने कहा कि यह जाहिर सूचना अधिवक्ताओं के माध्यम से जारी होना चाहिए ना कि कर्मचारियों के माध्यम से जारी होना चाहिए, जिन-जिन कर्मचारियों ने झोन पर रोजाना हजारों-हजार रुपये कमाने का खेल किया उन पर कार्रवाई की जाए, नहीं तो कांग्रेस भंडाफोड़ करेगी।
आम उपभोक्ता पर कितना असर पड़ा? चौकसे और चौरसिया ने कहा
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 22 अगस्त 2026 के अंक में पृष्ठ 3 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




