सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की शिकायत

फर्स्ट ईयर के छात्रों को रात 1 बजे हॉस्टल में उठाया

एमजीएम मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर रैगिंग की शिकायत सामने आई है। फर्स्ट ईयर के छात्रों के द्वारा यह शिकायत की गई है कि रात के 1 बजे के बाद सीनियरों के द्वारा उन्हें हॉस्टल में आकर नींद से उठाया गया। मेडिकल कॉलेज में पूर्व में भी रैगिंग की शिकायत सामने आती रही है। उसे समय इन शिकायतों को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन के द्वारा चाकचौबंद व्यवस्था किए जाने का दावा किया जाता रहा है। इस दावे के बीच में मेडिकल कॉलेज से रैगिंग की नई शिकायत सामने आई है। मेडिकल कॉलेज के फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों ने कहा है कि वे लोग जब रात के समय पर अपने हॉस्टल में सो रहे थे उसे समय पर रात में एक से तीन बजे के बीच में सीनियरों के द्वारा आकर उनके कमरे के दरवाजे बजाए गए। उन्हें कमरे से बाहर निकल कर नीचे आने के लिए कहा गया। डर के मारे फर्स्ट ईयर के छात्रों ने अपने कमरे के दरवाजे नहीं खोले और वह कमरे में ही बैठे रहे। इस मामले की शिकायत नेशनल मेडिकल काउंसिल नई दिल्ली को की गई है। वहां से यह शिकायत मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के पास आ गई है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि शिकायत की जांच के लिए एंटी रैगिंग कमेटी को मामला दे दिया गया है। इस कमेटी के से रोका जा रहा है। द्वारा कल इस मामले पर विचार किया गया। कमेटी ने यह फैसला लिया है कि रैगिंग की शिकायत करने वाले विद्यार्थियों के बयान दर्ज किए जाएं। इसके साथ ही इस हॉस्टल के सीसीटीवी कैमरा के फुटेज चेक किए जाएं। यदि यह शिकायत सही पाई जाती है तो जिम्मेदार और दोषी पाए जाने वाले विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन के द्वारा शिकायत की जांच शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही यह हकीकत भी उजागर होकर सामने आई है कि पूर्व में इसी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग से परेशान होकर 50 विद्यार्थियों के द्वारा हॉस्टल छोड़ दिया गया था।

कॉलेज का हॉस्टल एक ऐसा स्थान है जहां पर की विद्यार्थी सबसे ज्यादा रैगिंग के शिकार होते हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए रैगिंग से बचने के लिए बहुत से विद्यार्थियों के द्वारा हॉस्टल छोड़ दिया जाता है। यह विद्यार्थी दूसरे स्थान पर प्राइवेट कमरा किराए पर लेकर वहां पर रहने लगते हैं।

साख को लगता है बट्टा

मेडिकल कॉलेज में जब रैगिंग की शिकायत सामने आती है तो कॉलेज की साख को बट्टा लगता है। सरकार की ओर से बार-बार मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रबंधन को यह चेतावनी दी जा रही है कि उनके कॉलेज में किसी भी हालत में रैगिंग नहीं होना चाहिए। रैगिंग पर रोक लगाने के लिए सरकार बहुत ज्यादा सख्ती के साथ काम कर रही है। ध्यान रहे कि पूर्व में रैगिंग के कारण परेशान होकर कई शहरों में विद्यार्थी आत्महत्या करने जैसे भी कदम उठा चुके हैं। इन घटनाओं को ध्यान में रखते हुए ही रैगिंग को सख्ती

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 29 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें