शहर की सड़कों और कचरा प्रबंधन व्यवस्था के लिए सिरदर्द बन चुके नारियल के खोल को उपयोगी उत्पादों में बदलने की योजना अभी जमीन पर आकार लेने का इंतजार कर रही है। नगर निगम ने देवगुराड़िया में 60 टन प्रतिदिन क्षमता के नारियल वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन ताजा सरकारी टेंडर रिकॉर्ड में परियोजना का अवॉर्ड अभी लंबित दिखाई दे रहा है। यानी फिलहाल प्लांट के शुरू होने की स्थिति नहीं बनी है। नगर निगम ने मई 2026 में पीपीपी मोड पर सात साल के लिए प्लांट की स्थापना, मशीनरी की सप्लाई, इंस्टॉलेशन और संचालन के लिए टेंडर जारी किया था। टेंडर की अंतिम तारीख 16 जून और बोली खोलने की तारीख 17 जून निर्धारित थी। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक दो एजेंसियों ने तकनीकी बोली में हिस्सा लिया। इसके बाद प्रक्रिया अवार्ड पेंडिंग स्थिति में है।
रोज 50-60 टन खोल बनते हैं
चुनौती- नगर निगम के अनुसार शहर में रोजाना करीब 50 से 60 टन नारियल के खोल निकलते हैं। कठोर होने के कारण इनका सामान्य कचरा प्रसंस्करण में निपटान आसान नहीं है। इसी समस्या को देखते हुए देवगुराड़िया में अलग प्रोसेसिंग यूनिट प्रस्तावित की गई है।
कचरे से बनेगा कमाई का सामान-
प्रस्तावित यूनिट में नारियल वेस्ट से कॉयर फाइबर और कोकोपीट जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाने हैं। केंद्र सरकार ने भी इंदौर के मॉडल को नारियल वेस्ट से कोकोपीट और कॉयर बनाने वाले सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल के रूप में रेखांकित किया है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 20 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 5 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




