सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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89³ स्टेशनों पर स्वच्छ पेयजल और बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव

ग और रिपोर्ट ने रेलवे के विश्वस्तरीय दावों की हकीकत उजागर कर दी है। 89³ स्टेशनों पर स्वच्छ पेयजल, बैठने की जगह व साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव…

ग और रिपोर्ट ने रेलवे के विश्वस्तरीय दावों की हकीकत उजागर कर दी है। 89³ स्टेशनों पर स्वच्छ पेयजल, बैठने की जगह व साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव रेलवे की गंभीर लापरवाही दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों से सरकार लगातार विश्वस्तरीय गुणवत्ता वाली सुविधाओं से लैस रेल सेवाएं मुहैया कराने के दावे करती रही है। मगर आज भी अगर हालत यह है कि अपने गंतव्य तक जाने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचे यात्रियों को पीने का साफ पानी मिलना भी मुश्किल हो रहा हो, तो इसे किस तरह देखा जाएगा। यह स्थिति केवल स्वच्छ पेयजल के अभाव की ही नहीं है, बल्कि यात्रियों को ज्यादातर बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने में भारतीय रेलवे ने जिस स्तर पर लापरवाही दर्शायी है, उससे पता चलता है कि आम मुसाफिर शायद केवल आमदनी बढ़ाने का जरिया भर बन कर रह गए हैं। गौरतलब है कि संसद की लोकलेखा समिति ने कई स्टेशनों के अंकेक्षण में पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था, पंखे और प्लेटफार्म की छत जैसी बुनियादी सुविधाओं में व्यापक कमियां पाईं हैं और रेल मंत्रालय के अधिकारियों से इस मसले पर जवाब मांगा है। हैरानी की बात यह है कि रेल महकमे ने करीब दस साल पहले ही सभी जगह पीने का पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। मगर आज भी सैकड़ों रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। पिछले महीने संसद में पेश एक रिपोर्ट में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने गंभीर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, कई स्टेशनों पर पीने के पानी के नमूनों में ई-कोलाई जीवाणु पाए गए थे, वहीं नवासी फीसद से ज्यादा स्टेशनों पर बैठने की जगह, शौचालय, पंखे और संकेतक जैसी बुनियादी सुविधाओं में भी कई खामियां पाई गई थीं। यह अपने आप में विचित्र है कि यात्रा के दौरान जिन सुविधाओं की जरूरत हर यात्री को होती है और इसे मुहैया कराना रेलवे की जिम्मेदारी है, उसके प्रति घोर उपेक्षा बरती जाती है। जिन रेलवे स्टेशनों पर पानी के नल होते भी हैं, वहां साफ-सफाई की बुरी हालत की वजह से ज्यादातर लोगों को बोतलबंद पानी खरीद कर ही अपनी प्यास बुझानी पड़ती है। ट्रेन के डिब्बों और शौचालयों का उपयोग सिर्फ मजबूरी और सेहत के लिहाज से जोखिम का ही मसला होता है। लंबे समय से ऐसी शिकायतें कायम रहने और सवाल उठने के बावजूद आज भी अगर रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में बुनियादी सुविधाएं इस कदर उपेक्षित हैं, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर की रेल सेवा मुहैया कराने के दावे का क्या मतलब रह जाता है। आईआईटी बॉम्बे के सेकंड ईयर के एक छात्र ने शुक्रवार को आत्महत्या कर लिया। घटना से कुछ ही घंटों पहले उसे एग्जाम हॉल में मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पाया गया था। 19 साल के छात्र की मौत के बाद कैंपस में 400 से ज्यादा छात्रों ने प्रदर्शन किया और चल रहे मिड-सेमेस्टर एग्जाम को पोस्टपोन कर दिया गया। डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग का छात्र कथित तौर पर एग्जाम हॉल में मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पाया गया था।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 20 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें