ई स्तर पर प्रशिक्षण हासिल कर शिक्षक बनने के बावजूद यह समझना जरूरी क्यों नहीं समझा जाता कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को अगर किसी बात पर दंडित किया जाता है, तो उसके कोमल मन-मस्तिष्क पर कैसा असर पड़ता है। इस संबंध में दुनिया भर में न जाने कितने अध्ययन सामने आ चुके हैं कि स्कूली बच्चों को किसी भी रूप में प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए। देश में सभी शिक्षक इसके लिए न केवल शैक्षिक दायित्व के मुताबिक, बल्कि कानूनी रूप से भी बाध्य हैं। मगर यह समझना मुश्किल है कि कुछ शिक्षकों को बच्चे की किसी गलती का समाधान सिर्फ उन्हें अलग-अलग तरह से दंडित या प्रताड़ित करने में ही क्यों नजर आता है। दिल्ली के विनोद नगर इलाके में एक सरकारी स्कूल में ग्यारह साल की बच्ची का कसूर सिर्फ इतना था कि वह अपनी कक्षा की किताबें ले जाना भूल गई थी। सिर्फ इसलिए शिक्षिका ने उसे कक्षा में पीछे हाथ ऊपर कर खड़े होने की सजा दे दी। इससे उसकी तबीयत बिगड़ गई और इलाज के दौरान कुछ दिन बाद मौत हो गई। हाल ही में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भी एक छह वर्षीय बच्चे को होमवर्क न कर पाने पर शिक्षिका ने पीटा और उसके बाद उसकी मौत हो गई। मंगलवार को हरियाणा के फरीदाबाद में सिर्फ बिरयानी खाने के सवाल पर एक छात्रा को चार घंटे तक खड़ा रहने की सजा दी गई। खबरों के मुताबिक, इससे आहत होकर उसने स्कूल की छत से कूद कर जान दे दी। सवाल है कि कई स्तर पर प्रशिक्षण हासिल कर शिक्षक बनने के बावजूद यह समझना जरूरी क्यों नहीं समझा जाता कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को अगर किसी बात पर दंडित किया जाता है, तो उसके कोमल मन-मस्तिष्क पर कैसा असर पड़ता है। शिक्षण के नियम-कायदों से लेकर शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देश इस मामले में बिल्कुल स्पष्ट हैं। हैरानी की बात है कि कुछ शिक्षक इन नैतिक और कानूनी तकाजों को ताक पर रख कर स्कूल परिसर में भी अपनी विचित्र कुंठाओं से संचालित होते हैं और बच्चों को अलग-अलग तरीके से प्रताड़ित करते हैं। जबकि कुछ बच्चे ऐसे हो सकते हैं, जिन पर कक्षा में प्रताड़ित किए जाने का घातक असर पड़े। अगर एक शिक्षक को स्कूल में किसी बच्चे की चूक में सुधार की जरूरत महसूस होती है और इसके लिए वह उसे दंडित करना ही एकमात्र उपाय मानता है, तो क्या यह उसके व्यक्तित्व, विवेक, प्रशिक्षण और जिम्मेदारी में कमी का सूचक नहीं है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 2 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




