संस्था अभ्यास मंडल ने कृष्णपुरा छत्री घाट पर आत्मनाद की गूंज गुंजाई। कान्ह-सरस्वती के पुनर्जीवन को जन अभियान बनाने का आह्वान फिर से किया गया। पहले भी इस तरह का आह्वान किया गया था। आओ, रूठी कान्ह- सरस्वती को मनाएं’ कार्यक्रम में शहर के पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, साहित्यकारों और पर्यावरण प्रेमियों ने नदी के प्रति अपने भाव व्यक्त किए। प्रदीप नवीन, डॉ. ओ.पी. जोशी, डॉ. एस.एल. गर्ग और डॉ. दिलीप वाघेला, सीबी सिंह, मुकेश चौहान ने अपनी बात रखी। वैशाली खरे, मनीष भालेराव, गिरीश चव्हाण, मुरली खंडेलवाल, इशाक चौधरी, दिवाकर घायल, सुनील बेनवंशी, डॉ. भूपेंद्र धारवा, डॉ. विकास चौधरी,हरेराम वाजपेयी,सुनील व्यास, डॉ. स्वप्निल व्यास, शफी शेख, एन.के. उपाध्याय, किशन सोमानी, द्वारका मालवीय, शरद सोमपुरकर सहित अन्य ने अपनी भूमिका निभाई। जनभागीदारी से कान्ह नदी को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 29 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 6 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




