सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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आखिर कब सुध लेंगे शहर के व्यावसायिक बाजारों के यातायात प्रबंधन पर?

फुटपाथ पर कब्जे, सड़कों पर बेतरतीब पार्किंग और ऑटो-ई रिक्शा के अवैध स्टैंड ने शहर के सबसे व्यस्त बाजारों को बना दिया यातायात की भूलभुलैया -अक्षय जैन

इंदौर के व्यावसायिक बाजारों में ग्राहक खरीदारी करने आता है, व्यापारी कारोबार करने आता है, लेकिन बाजार तक पहुंचना ही अब किसी परीक्षा से कम नहीं। सड़क पर अव्यवस्थित पार्किंग, फुटपाथ पर कारोबार, सड़कों पर खड़े ऑटो और ई-रिक्शा तथा सवारियां पकड़ने की गला काट प्रतिस्पर्धा ने शहर के सबसे व्यस्त बाजारों का यातायात प्रबंधन लगभग बेपटरी कर दिया है। एमजी रोड से राजबाड़ा, खजुरी बाजार, गौराकुंड, सीतलामाता बाजार, सराफा, पीपली बाजार और गोपाल मंदिर रोड तक हालात किसी एक दिन की समस्या नहीं हैं। यह रोज का दृश्य है। पैदल चलने वाले के लिए फुटपाथ नहीं, वाहन चालक के लिए खुली सड़क नहीं और व्यापारी-ग्राहक के लिए व्यवस्थित पार्किंग नहीं। आखिर बाजार चले तो यातायात सिकुड़कर कुछ फीट में पुलिस ने कभी अभियान चलाया या कैसे चले?

सिमट जाता है। इसके बाद हॉर्न, नहीं। सवाल यह है कि अभियान के सबसे बड़ा सवाल यातायात विवाद, जल्दबाजी और जाम यही बाद निगरानी कहां गई? क्या व्यवस्था संभालने वाली मशीनरी से बाजार का नया यातायात अनुशासन यातायात व्यवस्था केवल वरिष्ठ है। सड़क पर नियम दिखाई नहीं बन गया है।

अधिकारी के सड़क पर उतरने तक देते, केवल वाहन दिखाई देते हैं।

छह माह पहले स्थिति इतनी ही सक्रिय रहती है? क्या स्थानीय जहां नो-पार्किंग होना चाहिए, वहां अनियंत्रित नहीं थी। स्वयं एडिशनल स्तर पर रोज की निगरानी की कोई वाहन खड़े हैं। जहां पैदल चलने पुलिस आयुक्त एवं यातायात प्रभारी जिम्मेदारी तय नहीं है? और सबसे वालों के लिए फुटपाथ होना चाहिए, राजेश त्रिपाठी अपने अधीनस्थ चिंताजनक स्थिति सराफा चौराहे की वहां सामान और अस्थायी कारोबार अधिकारियों, संबंधित थाना प्रभारियों है। यह केवल बाजार का चौराहा फैला है। जहां ऑटो और ई-रिक्शा और पुलिस बल के साथ इन क्षेत्रों में नहीं, शहर के अत्यंत संवेदनशील को निर्धारित स्थान पर खड़ा होना यातायात सुधार के लिए सड़कों पर और व्यस्त व्यापारिक क्षेत्रों में से एक चाहिए, वहां सड़क को ही स्टैंड बना उतरे थे। उस अभियान का असर है। यहां व्यापारी और ग्राहक बड़ी लिया गया है। ऑटो और ई-रिक्शा दिखाई दिया था। कुछ समय के लिए कीमत के माल और धन के साथ चालकों की सवारियां लेने की यातायात में अनुशासन आया और आवाजाही करते हैं। ऐसे स्थान पर प्रतिस्पर्धा ने समस्या को और गंभीर लोगों को लगा कि शायद अब दिनभर वाहनों की गुत्थमगुत्था, बना दिया है। एक वाहन सड़क के व्यवस्था स्थायी रूप से सुधरेगी।

अव्यवस्थित पार्किंग और जाम की बीच रुकता है तो उसके पीछे दूसरा

लेकिन वह सुधार टिक नहीं स्थिति केवल असुविधा नहीं, बल्कि रुकता है और देखते ही देखते पूरा पाया। – आज सवाल यह नहीं है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय भी बन जाती है। सवाल सीधा है क्या यहां नियमित यातायात पुलिस की प्रभावी मौजूदगी नहीं होनी चाहिए? शहर के बाजारों को पुलिसिया अभियान नहीं, स्थायी यातायात अनुशासन चाहिए। फुटपाथ खाली हों, पार्किंग निर्धारित हो, ऑटो-ई रिक्शा के स्टैंड तय हों और सड़क पर सवारी भरने की मनमानी पर तत्काल रोक लगे। स्थानीय थाना और यातायात पुलिस के बीच जिम्मेदारी स्पष्ट हो तथा रोजाना निगरानी का तंत्र दिखाई दे। इंदौर ने स्वच्छता में देश को रास्ता दिखाया है। अब शहर के व्यावसायिक बाजारों को भी यह पूछने का अधिकार है सड़क पर व्यवस्था कब दिखाई देगी? क्योंकि व्यापारी और ग्राहक जाम में फंसने के लिए बाजार नहीं आते। वे कारोबार और खरीदारी करने आते हैं। शहर को उनकी सुविधा चाहिए, यातायात की सजा नहीं।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 5 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 5 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें