नितिन राठौर)। मध्य प्रदेश के धार जिले के कुक्षी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम टांडा से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी के ग्रामीण जिलाध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्य चंचल पाटीदार के इस गृह क्षेत्र में स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यहाँ स्कूल भवन न होने के कारण 22 मासूम बच्चों को नए बने बालिका शौचालय के भीतर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ा। शौचालय में बच्चों की क्लास लगने की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। ग्रामीणों और शिक्षा विभाग अधिकारियों के अनुसार, स्कूल का पुराना भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका था, जिसकी छत कभी भी गिर सकती थी, इसके मद्देनजर जिला कार्यालय ने करीब दो-तीन साल पहले ही इस भवन को डिस्मेंटल (ध्वस्त) करने का आदेश जारी किया था। आदेश के बाद नया भवन बनाना शुरू तो हुआ, लेकिन उसका निर्माण कार्य अब तक अधूरा पड़ा है। कक्षा भवन के अभाव में स्कूल स्टाफ और बच्चों के सामने बैठने का बड़ा संकट खड़ा हो गया। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर बच्चों को कभी स्थानीय भिलट देव मंदिर में तो कभी खुले परिसर में पढ़ाया जा रहा था। बताया जाता है कि घटना के दिन धूप तेज होने का हवाला देते हुए शिक्षकों ने बच्चों को अस्थायी रूप से शौचालय की छांव और उसके अंदर बैठा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस शौचालय का नियमित इस्तेमाल शुरू हो जाता, तो बच्चों के बैठने के लिए यह जगह भी नसीब नहीं होती, आनन-फानन में बदला स्थान शौचालय में पढ़ाई का वीडियो और तस्वीरें वायरल होते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। विकासखंड शिक्षा अधिकारी हीरालाल निगवाल और बीआरसी विजय कुमार शुक्ला तुरंत जांच दल के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए बच्चों को शौचालय से हटाया और गाँव के ही एक नागरिक के निजी मकान में स्कूल संचालित करने की वैकल्पिक व्यवस्था की। इस मामले में बीईओ ने माना कि बच्चों को इस तरह शौचालय में बैठाना पूरी तरह गलत है और इसकी जांच की जा रही है। हालांकि, सत्ताधारी दल के इतने कद्दावर नेता और जिला पंचायत सदस्य के अपने ही क्षेत्र में बच्चों का यह हाल प्रशासनिक लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का जीता-जागता प्रमाण है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 13 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 10 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




