शहर कांग्रेस के अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने बताया कि नगर निगम के राजमोहल्ला जोनल कार्यालय पर दो करोड रुपए का घोटाला हुआ है। इस मामले में सबसे बड़ा मजाक यह है कि हम शिकायत करते रहे और नगर निगम जांच करते रहा, जबकि घोटाला करने वाले घोटाला करते रहे।
चौकसे ने बताया कि निगम के जोनल कार्यालय क्रमांक 2 राज मोहल्ला के अंतर्गत शहर के सभी प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र आते हैं। इस जोनल कार्यालय के क्षेत्र में राजस्व विभाग के अधिकारियों के द्वारा आर्थिक लाभ प्राप्त करते हुए लोगों के संपत्ति करके बकाया बिल को शून्य करने का खेल किया गया। इस बारे में हमारे द्वारा निगम के राजस्व विभाग में शिकायत की गई थी। इस शिकायत पर राजस्व विभाग के अपर आयुक्त आकाश सिंह के द्वारा जांच बैठाई गई थी। निगम के मुख्यालय में तैनात सहायक राजस्व अधिकारी मयूर पाटील के द्वारा यह जांच की गई। इस जांच की रिपोर्ट में उन्होंने हमारे द्वारा की गई शिकायत को सही पाया और यह पाया है कि इस जोनल कार्यालय के सहायक राजस्व अधिकारी और बिल कलेक्टर ने बाबुओं के साथ मिलकर कई खातों में गड़बड़ी की है।
उन्होंने बताया कि इस मामले का मजाक तो यह है कि एक तरफ शिकायत की जांच चल रही थी और दूसरी तरफ जोनल कार्यालय पर तैनात राजस्व विभाग के अधिकारी लोगों के संपत्ति करके बकाया खाते के लाखों रुपए को शून्य करने में लगे हुए थे। उन्होंने बताया कि 15 सितंबर से नगर निगम के द्वारा इस घोटाले के बारे में कांग्रेस की शिकायत के आधार पर जांच की जा रही थी। इस जांच के चलते हुए 21 सितंबर को फिर से इस जोनल कार्यालय के राजस्व विभाग के अधिकारियों ने संपत्तिकर के सात खाते में बकाया राशि शून्य कर दी। जबकि इन खातों में बकाया राशि 8 लाख की थी। निश्चित तौर पर इस बकाया राशि को शून्य करने के एवज में इन कर्मचारियों के द्वारा आर्थिक लाभ प्राप्त किया गया है। इस मामले में जांच के बाद नगर निगम के द्वारा अधिकारियों पर कोई कार्रवाई करने के बजाय उन्हें नोटिस देकर और गड़बड़ी करने का अवसर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस पूरी गड़बड़ी में केवल जोनल कार्यालय के कर्मचारी अपने दम पर इतना बड़ा खेल कर लें यह संभव नहीं है। इस घोटाले में नगर निगम के मुख्यालय के अधिकारी और कर्मचारी जब तक सहभागी नहीं बनेंगे तब तक यह खेल नहीं हो सकता है। इसके पहले जब नगर निगम का नामांतरण घोटाला उजागर होकर सामने आया था तो उसे समय पर नगर निगम के अधिकारियों के द्वारा यह दावा किया गया था कि उन्होंने अब व्यवस्था को बहुत बेहतर बना दिया है। अब इस व्यवस्था में कोई भी अधिकारी और कर्मचारी नगर निगम को राजस्व की हानि पहुंचाते हुए लाभ अर्जित नहीं कर सकेगा। निगम के इस दावे की हकीकत नामांतरण घोटाले की जांच रिपोर्ट आने के बाद 2 महीने के अंदर ही सामने आ गई है। ध्यान रहे कि निगम के राज मोहल्ला जोनल कार्यालय पर हुए इस घोटाले को लेकर नगर निगम के द्वारा कार्रवाई करने के नाम पर शोकेस नोटिस जारी किए गए हैं। इस नोटिस को जारी करने को भी नगर निगम के द्वारा अपनी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। निगम के अधिकारियों का मानना है कि नोटिस देने के बाद जब संबंधित का जवाब आ जाएगा तो फिर उसके बाद हम आगे की कार्रवाई करेंगे। इसी बीच कांग्रेस के द्वारा नोटिस दिए जाने की स्थिति के बीच में वापस गड़बड़ियों की जाने के तथ्य सामने रख दिए गए हैं। उक्त तथ्य उजागर होने से यह स्पष्ट हो गया है कि निगम के द्वारा नोटिस देने के नाम पर दबाव बनाने का जो प्रयास किया जा रहा था वह प्रयास कोई असर नहीं छोड़ रहा है। निगम के राजस्व विभाग को घोटाले के विभाग के रूप में पहचाने जाने लगा है। इस विभाग में एक के बाद एक गड़बड़ी सामने आते जा रही है।
मुकदमा दर्ज कराओ
इसी बीच कांग्रेस के द्वारा यह मांग की गई है कि राज मोहल्ला जोनल कार्यालय में जो गड़बड़ी की गई है उस गड़बड़ी को लेकर पुलिस थाने में निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाना चाहिए। निगम के द्वारा तो नामांतरण घोटाले में भी साइबर पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इस मुकदमे के दर्ज होने के बाद भी अभी तक कार्रवाई के नाम पर कोई बड़ा एक्शन नहीं हो पाया है। ऐसे में लगता है कि यह मुकदमा दर्ज करवाना और मामले को ठण्डे बस्ते में डालना एक दूसरे से जुड़ा हुआ है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 29 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 3 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




