भाजपा नेता और संस्था सार्थक के बैनरतले कल ‘संघर्ष से संसद तक: वैचारिक प्रतिबद्धता’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। राज्यसभा सांसद सदानंदन मास्टर ने कन्नूर की राजनीतिक हिंसा से लेकर राज्यसभा तक की यात्रा सुनाते हुए बोले, बाधाएं तूफान बनकर आएं, आदर्श की ज्योति कभी नहीं बुझ सकती! उन्होने यह भी कहा कि पैर काटे, संकल्प नहीं; संघर्ष ने सदानंदन मास्टर को संसद तक पहुंचाया! कहा, ‘हमला मेरे शरीर पर हुआ, विचारों पर नहीं; संघ से मिला आत्मविश्वास और आत्मीयता मुझे हर विपरीत परिस्थिति में खड़ा रखती रही’ 19 लोगों का रक्त मेरी देह में आज भी दौड़ता है। सांसद ने कहा कि ‘मेरे दोनों पैर काट दिए
पाताल पानी कांग्रेस नेता सुनील यादव पहुंचे और उन्होंने आदिवासी समाजजनों को साथ लेकर माल्यार्पण का लाभ लिया।
भगवा रिक्शा संघ ने भी निभाई
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जुड़े भगवा ऑटो रिक्शा चालक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में संघ की पूरी टीम ने एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत रेवती रेंज पर पौधरोपण महाअभियान में सक्रिय सहभागिता की। वंदे मातरम और भारत माता के नारे भी गुंजाए। पौैधारोपण की गिनती में रिकार्ड बनने पर वीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि यह इन्दौर के लिए गर्व की बात है। गए, लेकिन मेरे विचारों की दिशा नहीं काटी जा सकी। मेरा शरीर घायल हुआ, मेरा संकल्प नहीं।’ प्रख्यात शिक्षाविद्, चिंतक एवं राज्यसभा सांसद सी. सदानंदन मास्टर ने इंदौर में अपने जीवन की उस त्रासदी को याद करते हुए यह बात कही, जिसने उनकी जिंदगी को दो हिस्सों, हमले से पहले और हमले के बाद, में बांट दिया। उन्होंने कहा कि 1994 में कन्नूर में राजनीतिक हिंसा का शिकार होने के बाद लंबे उपचार और कृत्रिम पैरों के सहारे उन्होंने जीवन को फिर खड़ा किया, लेकिन संघ से मिले आत्मविश्वास, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के स्नेह और समाज के सहयोग ने उन्हें कभी निराशा अथवा असहाय के भाव में नहीं जाने दिया। हरदीप दवे के साथ संवाद किया गया। सांसद सदानंदन मास्टर ने
बताया कि उनके दोनों पैर कटने के बाद लम्बे समय तक उपचार की गतिविधि से गुजरना पडा और कृत्रिम पैर लगाए गए, लेकिन इसके बावजूद संघ का कार्य और समाजसेवा की गतिविधियां रुकी नहींं। उन्होंने कहा, ‘मेरा मन तनिक भी विचलित नहीं हुआ। न निराशा ने मुझे प्रभावित किया और न असहाय की
हमला मेरे शरीर पर हुआ, विचारों पर नहीं, संघ से मिला आत्मविश्वास और आत्मीयता मुझे हर विपरीत परिस्थिति में खड़ा रखती रही’
भावना ने। इसके पीछे संघ की कार्यपद्धति, शाखा के माध्यम से प्राप्त आत्मविश्वास, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का स्नेह और संघ परिवारों से मिलने वाला संरक्षण प्रमुख आधार रहे।' उन्होंने कहा कि ‘बाधाएं भले ही तूफान बनकर आएं, स्वयंसेवक के भीतर जलने वाली आदर्श की ज्योति कभी बुझ नहीं सकती।’ उन्होने यह भी कहा कि वे स्वयं वामपंथी विचारधारा से प्रभावित थे और उनका पारिवारिक परिवेश भी वामपंथी राजनीति के निकट था। सवाल यह था कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने उन्हें उस विचारधारा से अलग होकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और आगे चलकर संघ की ओर जाने के लिए प्रेरित किया? उन्होने यह भी कहा कि राज्यसभा का दायित्व उनके लिए बिल्कुल अप्रत्याशित था। बहुत सारे मुद्दे जिनमें युवाओं के भी थे मुद्दों पर बेबाक बात की गई। उन्होने कहा कि इन्दौर आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। साथ ही दीपक जैन टीनू और संस्था 'सार्थक' के प्रयासों की उन्होंने सराहना भी की और दीपक जैन टीनू को ऊर्जावान युवा कार्यकर्ता बताया। दीपक जैन टीनू, नितेश मुच्छाल, पंकज जैन, अमित सोनी, सिद्धार्थ निखरा, नितिन जोशी, आनंद बोकड़िया, तुषार गावड़े, गौरव नाहर, केशव पोरवाल, अंकित रावल, विशाल डाकोरिया सहित अन्य ने इस आयोजन में अपनी भूमिका निभाई।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 10 अगस्त 2026 के अंक में पृष्ठ 2 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




