दिगम्बर जैन समाज से जुड़े राजेश जैन दद्दू ने बताया कि दीपावली के निर्वाण लाड़ू को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई थी। संत प्रणुत सागर महाराज ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। संत ने समग्र जैन समाज को संबोधित करते हुए कहा कि जैन समाजजन 9 नवम्बर सोमवार को निर्वाण लाड़ू एवं भगवान महावीर स्वामी का महामोक्ष मनाए।
राजेश जैन ने बताया कि संत ने स्पष्ट कहा कि लक्ष्मी पूजन 8 नवम्बर रविवार को होगा, लेकिन जैन शासन के अनुसार भगवान महावीर का निर्वाण कल्याणक 9 नवम्बर को ही मनाया जाएगा, क्योंकि दो तारीखों में अन्तर है। यह भी बताया कि 8 नवम्बर रविवार की शाम को प्रदोष काल में अमावस्या है इसलिए हिन्दू मत से दिवाली 8 नवम्बर को हैं और दीपावली का मुहूर्त शाम 5.54 से शाम 7.50 बजे तक है। जैन निर्वाण का नियम उदयातिथि और निशाकाल का है, जैन आगम के अनुसार भगवान महावीर का निर्वाण कार्तिक कृष्णा अमावस्या के प्रातःकाल (उषाकाल) में हुआ था। अमावस्या 8 नवंबर सुबह 11:27 से शुरू होकर 9 नवंबर दोपहर 12:31 तक है। 9 नवंबर को सूर्योदय के समय भी अमावस्या है और दोपहर तक है। इसलिए जैन मंदिरों में उदयातिथि मानकर 9 नवंबर सोमवार को सुबह ही निर्वाण महोत्सव मनाया जाएगा। यह जैन परंपरा में पहले भी कई बार हुआ है जब लक्ष्मी पूजन और निर्वाण पूजन अलग-अलग दिन पड़े हैं। दीपावली 8 नवम्बर को महालक्ष्मी पूजन और दीप सज्जा का आयोजन करें और 9 नवम्बर को सुबह भगवान महावीर निर्वाण लाड़ू अर्पण करें। गौतम स्वामी केवलज्ञान लाडू का निर्वाण कांड पाठ के साथ आयोजन करें। मंदिरों में लाड़ू चढ़ाए जाए। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि गुरु देव के वचन का पालन करना ही सच्चे श्रावक का धर्म है। इसलिए आप सभी 9 नवम्बर सोमवार को ही जिनालय में पहुंचकर निर्वाण लाडू चढ़ाएं।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 24 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 7 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




