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नर्मदा की ट्रंक लाइन फोड़ी, ठेकेदार पर 1 लाख जुर्माना

अपर आयुक्त बोले- भागीरथपुरा दूषित जल प्रकरण के बाद बनी थी 20 बिंदुओं की खुदाई से पहले निगम से अनुमति नहीं ले रहे विभाग, सरकारी विभाग ही तोड़ रहे सुरक्षा नियम का पालन नहीं

शहर में पेयजल लाइनों को सुरक्षित रखने के लिए नगर निगम ने करीब 20 बिंदुओं की एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) बनाई, सभी सरकारी विभागों को इसकी जानकारी भी दी, लेकिन जमीन पर इसका पालन नहीं हो रहा। अब इसका ताजा उदाहरण पाटनीपुरा चौराहे पर गुरुद्वारे के पास सामने आया, जहां विधायक निधि से बोरिंग के दौरान नर्मदा की ट्रंक लाइन फूट गई। इससे नंदानगर क्षेत्र की तीन पानी की टंकियां प्रभावित हुईं और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मामले में नगर निगम ने लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। घटना ने सरकारी विभागों के बीच तालमेल और पेयजल लाइनों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भागीरथपुरा कांड के बाद बनी थी गाइडलाइन

दिसंबर में भागीरथपुरा में दूषित पेयजल की घटना के बाद नगर निगम ने शहर की जल सप्लाई लाइनों को सुरक्षित रखने के लिए एसओपी तैयार की थी। इसमें स्पष्ट किया गया था कि निगम सीमा में किसी भी तरह की खुदाई करने से पहले संबंधित जोन कार्यालय से अनुमति लेना जरूरी होगा। खुदाई के दौरान यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नर्मदा की पाइपलाइन, ड्रेनेज लाइन या अन्य भूमिगत नेटवर्क को नुकसान न पहुंचे। इसके बावजूद गैस पाइपलाइन, इंटरनेट केबल, बिजली लाइन और बोरिंग के काम के दौरान जलप्रदाय लाइनों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

एक लाइन फूटी, तीन टंकियों पर असर

अपर आयुक्त आशीष पाठक ने बताया कि पाटनीपुरा चौराहे के पास बोरिंग के दौरान नर्मदा की मुख्य ट्रंक लाइन क्षतिग्रस्त होने से नंदानगर क्षेत्र की तीन पानी की टंकियां प्रभावित हुईं। इससे जलप्रदाय व्यवस्था पर असर पड़ा और रहवासियों को परेशानी हुई। लाइन टूटने से निगम को मरम्मत और जलप्रदाय व्यवस्था संभालने की चुनौती का सामना करना पड़ा। निगम ने नुकसान के लिए जिम्मेदार ठेकेदार एजेंसी पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया और अधिकारियों को भविष्य में गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अब सभी विभागों को फिर लिखेंगे पत्र

अपर आयुक्त पाठक के मुताबिक, खुदाई के दौरान पेयजल लाइनों की सुरक्षा के लिए बनाई गई गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा है। इस कारण सभी संबंधित विभागों को दोबारा पत्र लिखकर निर्देश दिए गए हैं कि खुदाई से पहले संबंधित जोन कार्यालय से अनुमति लें और नुकसान होने पर उसकी भरपाई करें। साथ ही एफआईआर दर्ज करवाने जैसी सख्त कार्रवाई भी होगी।

सवाल: नियम बने, फिर निगरानी क्यों नहीं?

शहर में भूमिगत पाइपलाइन और केबल बिछाने के काम लगातार होते हैं। ऐसे में केवल एसओपी जारी करना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि खुदाई से पहले अनुमति, मौके पर लाइन की पहचान और काम के दौरान निगरानी सुनिश्चित हो। सरकारी विभागों के काम में ही नियमों का पालन नहीं होगा तो पेयजल नेटवर्क को नुकसान से बचाना मुश्किल होगा। जुर्माने की कार्रवाई के साथ यह तय करना भी जरूरी है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए विभागों के बीच समन्वय कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 24 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 8 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें

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सिटी ब्लास्ट, 24 अक्टूबर 2026, पृष्ठ 8