शनिवार, 24 अक्टूबर 2026
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जैन समाज के सामूहिक इस्तीफे ना हो इसे लेकर की जा रही है पहल

गुमराह ना करें इस पर भी होगी रोक-टोक, धार्मिक सम्पत्तियों का संरक्षण और हस्तांतरण निषेध हो, सात प्रमुख बिंदुओं पर हुई चर्चा

गोम्मटगिरि मामले में सामूहिक इस्तीफा सौंपकर अब वहां 100 आजीवन ट्रस्टी 1-1 करोड़ रु. में बनाने का लक्ष्य कई दिगम्बर जैन समाजजनों को पच नहीं रहा है। कुछ समाज के वरिष्ठजनों ने अन्य लोगों के साथ विचार-विमर्श शुरू किए हैं कि जल्द ही 110 से अधिक मंदिर पदाधिकारियों की बैठक बुलाकर सामाजिक संस्थाओं के ट्रस्ट से सामूहिक इस्तीफे नहीं दिए जाए। इसे लेकर प्रावधान किया जाना है। कुछ लोगों ने इस मामले में बैठक भी की और बड़े-बड़े मुद्दों पर चर्चा भी की। नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि धार्मिक तीर्थों, मंदिरों, धर्मशालाओं एवं संस्थागत संपत्तियों की सुरक्षा हेतु विशेष प्रावधान किए जाए। धार्मिक संपत्तियों का संरक्षण एवं हस्तांतरण निषेध हो। साथ ही सामूहिक त्यागपत्र से नियंत्रण परिवर्तन पर रोक लगे। यह भी तय हुआ कि यदि किसी धार्मिक संस्था के सभी या अधिकांश ट्रस्टी त्यागपत्र देते हैं, तो केवल इस आधार पर संस्था की संपत्ति, प्रबंधन अथवा नियंत्रण किसी अन्य व्यक्ति, समूह या नई समिति को मनमाने ढंग से हस्तांतरित नहीं किया जाएगा। ट्रस्ट की किसी भी सम्पत्ति पर व्यक्तिगत अधिकार नहीं होगा। मनमाने तरीके से ट्रस्ट की सम्पत्ति का हस्तांतरण का अधिकार भी ट्रस्टी को नहीं होगा। संपत्ति का प्रबंधन संस्था के पंजीकृत न्यासपत्र, लागू कानून तथा संपत्ति आवंटन की शर्तों के अनुसार ही किया जाएगा। पुराने ट्रस्टियों के त्यागपत्र, मृत्यु अथवा पद रिक्त होने की स्थिति में नए ट्रस्टियों की नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया, वैध अधिकारों, पारदर्शिता और आवश्यक अनुमोदन के अनुसार की जाएगी।

केवल त्यागपत्र देने से किसी नए समूह को स्वतः नियंत्रण प्राप्त नहीं होगा। सरकार से प्राप्त भूमि या अनुदान के हस्तांतरण, उपयोग परिवर्तन अथवा प्रबंधन परिवर्तन पर यदि कोई प्रतिबंध या पूर्व अनुमति की शर्त लागू है, तो उसका अनिवार्य रूप से पालन किया जाएगा। आवश्यक होने पर संबंधित सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति प्राप्त की जाएगी। किसी भी धार्मिक या सामाजिक संपत्ति को निजी लाभ, गुटबाजी अथवा व्यक्तिगत हितों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। सभी निर्णय संस्था के उद्देश्यों, श्रद्धालुओं के हितों तथा सार्वजनिक जवाबदेही को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे। कुल 7 बिन्दुओं पर चर्चा की गई और यह भी चर्चा की गई कि दो-दो सामाजिक संसद होने के बावजूद गोम्मटगिरि के सामूहिक इस्तीफे पर दोनो ही संस्था के पदाधिकारियों ने कोई पहल नहीं की। ऐसी ही स्थिति गंगवाल छात्रावास में शिकायत के बाद कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। बैठक के दौरान जो सातवां पाइंट बनाया उसमें यह लिखा है कि धारा का उल्लंघन होने की स्थिति में संस्था के नियमों तथा लागू कानून के अंतर्गत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर सक्षम न्यायालय, लोक न्यास प्राधिकारी या संबंधित सरकारी विभाग से उचित राहत मांगी जा सकेगी। धार्मिक तीर्थ, मंदिर, धर्मशाला और समाजहित में स्थापित संस्थाएं किसी व्यक्ति या गुट की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था एवं जनहित से जुड़ी धरोहर हैं। उनका संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। कुल मिलाकर पुराने बुजुर्गों की आस्था का स्थल गोम्मटगिरि और मिश्री गंगवाल छात्रावास इन दिनों चर्चा में हैं। इन पर मंथन किया गया और जल्द ही सारे मंदिर के पदाधिकारियों को बैठाकर आगे की रूपरेखा बनाई जाएगी और 7 बिन्दुओं पर चर्चा की जाएगी उसी आधार पर आगे के कदम उठाए जाएंगे।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 24 October 2026 के अंक में पृष्ठ 3 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें

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सिटी ब्लास्ट, 24 October 2026, पृष्ठ 3